नई दिल्ली/केप वर्डे। अटलांटिक महासागर में तैर रहे एक डच क्रूज जहाज ‘एमवी होंडियस’ (MV Hondius) में उस वक्त हड़कंप मच गया जब वहां जानलेवा ‘हंतावायरस’ ने दस्तक दी। ओशनवाइड एक्सपेडिशन्स कंपनी द्वारा संचालित इस जहाज पर कुल 149 लोग सवार हैं, जिनमें दो भारतीय चालक दल के सदस्य भी शामिल हैं। इस रहस्यमयी वायरस की चपेट में आने से अब तक तीन विदेशी यात्रियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिससे पूरी दुनिया के स्वास्थ्य संगठनों की चिंता बढ़ गई है।
केप वर्डे के पास खड़ा है ‘मौत का जहाज’
फिलहाल यह जहाज अटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास खड़ा है। खबरों के मुताबिक, मरने वालों में एक डच दंपति (पति-पत्नी) और एक जर्मन नागरिक शामिल है। एक अन्य यात्री की हालत बिगड़ने पर उसे आनन-फानन में जहाज से उतारकर अस्पताल भर्ती कराया गया है। जहाज पर ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और स्पेन सहित 23 अलग-अलग देशों के पर्यटक मौजूद हैं। राहत की बात यह है कि दोनों भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं, हालांकि उनकी विस्तृत स्वास्थ्य रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
चूहों से फैलता है यह जानलेवा संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार, हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों के मल-मूत्र या लार के जरिए फैलता है। जब लोग ऐसी दूषित हवा या धूल में सांस लेते हैं जहां वायरस के कण मौजूद हों, तो वे संक्रमित हो जाते हैं। यह वायरस चूहों के काटने या दूषित भोजन के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्पष्ट किया है कि यह आमतौर पर इंसान से इंसान में नहीं फैलता, इसलिए आम जनता के लिए इसका खतरा फिलहाल कम है।
लापता यात्रियों ने बढ़ाई WHO की धड़कनें
जहाज पर इस प्रकोप का पता चलने से पहले ही लगभग 24 यात्री 12 अलग-अलग देशों के लिए रवाना हो चुके थे। स्वास्थ्य अधिकारी अब इन ‘लापता’ यात्रियों की तलाश कर रहे हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बताया कि कनाडा, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और तुर्की सहित 12 देशों को इस बारे में अलर्ट जारी कर दिया गया है। हंतावायरस के लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ्ते का समय लग सकता है, जो इसे और भी खतरनाक बनाता है।
भारत में हंतावायरस का इतिहास
भारत के लिए यह वायरस बिल्कुल नया नहीं है। देश में हंतावायरस का पहला मामला साल 1964 में तमिलनाडु के वेल्लोर में सामने आया था, जिसे ‘थोटापलायम वायरस’ नाम दिया गया। साल 2008 में वेल्लोर में ही इसके 28 मामले मिले थे। इसके अलावा, 2016 में मुंबई में एक 12 वर्षीय बच्चे की इस वायरस के कारण मौत की खबर भी आई थी। भारत में यह मुख्य रूप से उन लोगों में देखा गया है जो चूहों या सांपों के संपर्क में अधिक रहते हैं।
हंतावायरस से बचाव के मुख्य तरीके
-
सांस के जरिए बचाव: पुरानी इमारतों, गोदामों या जहाजों के स्टोरेज एरिया में मास्क पहनकर ही जाएं।
-
साफ-सफाई: चूहों के मल-मूत्र वाली जगहों को छूने से बचें और हाथों को नियमित रूप से धोते रहें।
-
सुरक्षित खान-पान: भोजन और पानी को चूहों की पहुंच से दूर रखें।
-
दूरी बनाएं: यदि कोई व्यक्ति संक्रमित है, तो उसके बहुत करीब रहने या एक ही बेड साझा करने से बचें।
voice of india
