
नई दिल्ली: देश के अंतरिक्ष अभियान को लेकर उठ रही तमाम चर्चाओं और आशंकाओं के बीच भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का महत्व न तो घटा है और न ही आगे कभी कम होगा। इसरो हमेशा से देश के अंतरिक्ष सेक्टर का मुख्य आधार स्तंभ रहा है और आगे भी अपनी इसी मजबूत भूमिका में बना रहेगा।
निजी कंपनियों और इसरो के रोल पर स्थिति साफ
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए पवन गोयनका ने बताया कि वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में शुरू किए गए सुधारों का वास्तविक मकसद भारत के पूरे स्पेस इकोसिस्टम को रफ्तार देना है। इसके तहत योजना यह है कि जो रॉकेट, सैटेलाइट और संबंधित प्रणालियां पूरी तरह विकसित और स्थापित हो चुकी हैं, उनके भारी पैमाने पर निर्माण का जिम्मा घरेलू उद्योग संभाले। वहीं दूसरी तरफ, इसरो का पूरा फोकस नए वैज्ञानिक अभियानों, अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास (R&D), राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स और उन बुनियादी ढांचों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा, जिन्हें खड़ा करना निजी क्षेत्र के बूते से बाहर है।
कर्मचारी यूनियनों के पत्र के बाद सामने आया बयान
पवन गोयनका की यह सफाई ऐसे समय में आई है जब इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने विनिर्माण कार्यों को निजी हाथों में सौंपे जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। यूनियनों ने 4 सितंबर को इसरो प्रमुख वी. नारायणन को पत्र भेजकर इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। कर्मचारियों ने गोयनका के 21 अगस्त के उस कथित बयान का हवाला दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में इसरो किसी प्रक्षेपण यान का निर्माण नहीं करेगा और यह काम पूरी तरह निजी कंपनियों या सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के जरिए होगा।
तकनीक हस्तांतरण और नौकरियों को लेकर थीं चिंताएं
कर्मचारी संगठनों का कहना था कि ऐसे किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव को लेकर अंतरिक्ष विभाग की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए। पत्र में यह चिंता भी जताई गई थी कि इस बदलाव का मौजूदा कर्मचारियों, भविष्य की सरकारी भर्तियों और सेवा शर्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यूनियनों ने दो टूक कहा था कि इसरो की तकनीक देश की अमूल्य धरोहर है, लिहाजा इसके ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह होनी चाहिए। कर्मचारियों को इस प्रकार के महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिलने के बजाय विभाग से सीधे मिलनी चाहिए।
2030 तक हर साल 50 लॉन्च का बड़ा लक्ष्य
इन सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए इन-स्पेस अध्यक्ष ने साफ किया कि भारत ने वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 50 रॉकेट लॉन्च करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इतना बड़ा मुकाम कोई भी एक एजेंसी अकेले अपने दम पर हासिल नहीं कर सकती। इसके लिए इसरो और देश के निजी उद्योगों को एक साथ कदमताल करनी होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि इसरो लगातार नए अनुसंधानों के जरिए विज्ञान की सीमाओं का विस्तार करेगा, जबकि निजी क्षेत्र उसी वैज्ञानिक प्रगति को व्यापक उत्पादन में तब्दील करके अधिक सैटेलाइट, अधिक रॉकेट और बेहतर प्रक्षेपण क्षमता का निर्माण करेगा।
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