
फाइल फोटो
कानपुर। बरसात के मौसम में स्कूली बच्चो में कॉक्सैकी नामक वायरस तेजी से फैल रहा है। यह वायरस ओपीडी में आने वाले बच्चों में ज्यादा देखने को मिल रहा है,दस से पंद्रह साल के बच्चों पर ज्यादा प्रभाव डाल रहा है जिससे बच्चों में बुखार, खुजली होना, लाल दाने पढ़ना ,मुंह में दाने का होना जैसी समस्याएं हो रही है। इस बीमारी की समस्या को लेकर पांच से दस मरीज प्रतिदिन ओपीडी में आ रहे है। इस बीमारी और निदान के बारे में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के चर्म रोग विभाग के एसो. प्रो. डॉ स्वेतांक ने जानकारी दी।
कॉक्सैकी बीमारी होने का कारण एक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से बच्चों में हाथ, पैर और मुंह की बीमारी (एचएफएमडी) के रूप में होता है। इसके लक्षणों में हाथों, पैरों और मुंह में छाले और दाने निकलना शामिल है। यह संक्रमण हवा से फैलने वाले कणों, लार और मल द्वारा फैलता है। उन्होंने बताया कि खास तौर पर यह 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में यह हृदय या मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है।
संक्रमण और लक्षण
कॉक्सैकी वायरस, जो एंटरोवायरस समूह का एक हिस्सा। यह एक बहुत संक्रामक वायरस है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली सांस की बूंदों से फैलता है। दूषित सतहों या मल के माध्यम से भी फैल सकता है। संक्रमण का खतरा छोटे बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी प्रणाली वाले लोगों को अधिक होता है।वायरस का लक्षण हे कि हाथों, पैरों और मुंह में दर्दनाक लाल चकत्ते या छाले निकलना, बुखार, गले में खराश होना है।
कॉक्सैकी वायरस का उपचार
कॉक्सैकी वायरस के उपचार लिए कोई विशिष्ट उपचार या टीका नहीं है। लक्षणों से राहत के लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं और गले की खराश या फफोलों के लिए सामयिक मरहम (टोपिकल ऑइनमेंट) लिख सकते हैं। इसके साथ ही बच्चे मास्क लगाए, एक दूसरे से हाथ न मिलाए, साथ में खाना न खाए व भीड़ भाड वाली जगहो से बचना चाहिए। साथ ही बार-बार हाथ धोने और स्वच्छता बनाए रखने से संक्रमण को रोका जा सकता है।
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