
-मां की डांट से क्षुब्ध होकर निकल पड़ी थी अनजाने सफर में
-अब मेडिकल और बयान के बाद परिजनों के सुपुर्द की जाएंगी
कानपुर देहात। न दुनियादारी की समझ न समाज के बहशी दरिंदों का खौंफ। मां की डांट से 12 साल की बच्ची इतना क्षुब्ध हो गई कि घर छोडऩे का फैसला कर लिया। 14 सितंबर को उसने अपने साथ छोटी बहन को लिया और अनजाने सफर पर निकल पड़ी। छोटी बहन की उम्र महज सात वर्ष। दोनों किसी ट्रेन से कानपुर सेंट्रल पहुंच गई। वहां एक बुढिय़ा की नजर इन पड़ी तो दोनों को बुलाकर बात की। फिर उन्हें अपने घर ले गई। खाना खिलाया और रात भर घर में रखा। सुबह दोनों बहनें फिर वहां से निकल गईं। अब किसी ट्रेन से झांसी पहुंच गई। वहां इधर उधर टहलने के बाद फिर किसी ट्रेन में सवार हो गईं तो मंगलवार को घाटमपुर पहुंच गई। वहां पुलिस की इन पर नजर पड़ी तो छानबीन शुरु हुई। सूचना गजनेर पुलिस को मिली तो उन्हें सकुशल लाया गया।
न मोबाइल और न दुनियादारी की समझ
गजनेर के रतवा गांव की लक्ष्मी (12) और प्रीती (7) दो नाबालिग बहनें घर से एक साथ लापता हुईं। सूचना पर पुलिस ने तत्काल गुमशुदगी दर्ज की और उनकी तलाश शुरु की। दरअसल बच्चियों की उम्र बेहद कम होने से पुलिस की चिंता बढ़ती जा रही थी। प्रभारी निरीक्षक जर्नादन प्रताप सिंह ने बच्चियों को सकुशल बरामदगी के लिए थाने में टीमेंं गठित की थीं। लगातार खुद मॉनीटरिंग करते रहे। पुलिस के सामने चुनौती इसलिए थी कि न तो बच्चियों के पास मोबाइल था और न ही उन्हें दुनियादारी की समझ थी। मंगलवार को घाटमपुर पुलिस ने दोनों को सकुशल बमराद करने के बाद राहत की सांस लीं। वहीं बच्चियों को देखकर उनकी मां भावुक हो गई। पुलिस ने भी राहत की सांस लीं।
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बयान-
दोनों बच्चियां सकुशल मिल गई हैं। उनका मेडिकल कराने के बाद कोर्ट में बयान कराए जाएंगे। इसके बाद माता पिता के सुपुर्द कर दिया जाएगा। बच्चियां ट्रेन से इधर उधर भटकती रहीं। घाटमपुर में पुलिस की नजर पड़ने के बाद सूचना मिली तो उन्हें गजनेर लाया गया। माता पिता को हिदायत दी गई है कि बच्चियों पर नजर रखें। उनसे लगातार संवाद करते रहें ताकि मन की बात वह माता पिता को बता सकें -संजय वर्मा, सीओ अकबरपुर
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