
–सीएमओ बोले, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर, गतिविधियों पर भी पैनी निगाह
बिल्हौर, कानपुर। चोरी के खौफ का जगराता अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ कि डेंगू व मलेरिया की दहशत पनप रही है। इसे मौसमी बदलाव के बीच बुखार के बढ़ते मामलों से हवा मिल रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग बेहतर सेवाएं प्रदान करते हुए हालात पर पैनी निगाह जमाए रखने की बात कह रहा है।
बिल्हौर तहसील क्षेत्र में भादो की बारिश के बीच बुखार के बादल छाए रहे हैं। बिल्हौर, शिवराजपुर, चौबेपुर व ककवन ब्लाक के दर्जनों गांव इसकी चपेट में हैं, जहां बुखार के मरीजों की संख्या का पारा लगातार तन्ना रहा है। निजी अस्पताल से लेकर सीएचसी तक रोगियों की कतारें नजर आ रही है। इस बीच डेंगू व मलेरिया की भयावह चिंता को बढ़ावा मिल रहा है। लोगों का कहना है कि भारी बारिश के चलते जगह–जगह जलभराव है, इससे डेंगू और मलेरिया की आशंका गहरा रही है। हालांकि फिलवक्त इसकी पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन दहशत से लोग बेचैन हैं। इस आलम में गांव स्तर पर कैंपिंग और आशाओं की सक्रियता को लेकर सवाल तैर रहे हैं। जानकारों की माने तो बहुतायत आशा कर्मचारी काम के लिए गांव से परहेज का रवैया अपनाए हैं, लिहाजा उन्हें क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं का सही इल्म नहीं हो रहा है। अंदेशा जताया जा रहा है कि समय रहते तवज्जो नहीं दी गई तो आज की अफवाह कल की हकीकत बन सकती है।
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मच्छरों से बचाव और झोलाछाप से किनारा करने की सलाह
बिल्हौर में बढ़ते बुखार संकट पर सीएमओ डॉ हरिदत्त नेमी ने दैनिक भास्कर से रोकथाम के उपाय साझा किए। बताया कि सामान्य बुखार मौसमी बदलाव के कारण हो सकता है, लेकिन डेंगू और मलेरिया मच्छर जनित रोग हैं। इनकी रोकथाम के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहन के रखने चाहिए, जलभराव से बचाव करना चाहिए, मच्छरदानी में सोना या अन्य किसी भी माध्यम से मच्छर के काटने से बचना चाहिए। डॉ नेमी ने बताया कि बुखार की समस्या पर स्थानीय सीएचसी में दिखाएं, वहां परीक्षण से लेकर बेहतर इलाज के भरपूर प्रबंध हैं, किसी भी स्थिति में झोलाछाप को दिखाने से किनारा करें।
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