Saturday , 18 April 2026

ईरान संकट : क्या चाहता है अमेरिका? ‘जितना डराया जा रहा है, स्थिति उतनी गंभीर नहीं’; गैस की कीमतों और शेयर बाजार पर कही यह बात

वाशिंगटन: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को चौंकाने वाला बयान दिया है। व्हाइट हाउस में कैबिनेट की अहम बैठक के दौरान ट्रंप ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ रहे असर को कमतर बताते हुए कहा कि स्थिति उतनी भयावह नहीं है, जितनी आशंका जताई जा रही थी। ट्रंप के इस आत्मविश्वास भरे लहजे ने न केवल अमेरिकी राजनीति बल्कि वैश्विक बाजारों में भी नई चर्चा छेड़ दी है।

शेयर बाजार और तेल की कीमतों पर ट्रंप की ‘चुटीली’ टिप्पणी

कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी ही शैली में चुटकी ली। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो मुझे लगा था कि युद्ध की आहट से तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और शेयर बाजार औंधे मुंह गिर जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।” ट्रंप ने इसका श्रेय अपनी सरकार की साख को देते हुए कहा कि शायद जनता को अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी टीम पर भरोसा है, इसलिए बाजार में वह अफरा-तफरी नहीं दिखी जिसकी उम्मीद थी।

$4 के करीब पहुंची गैस: क्या चुनाव में भारी पड़ेगी महंगाई?

भले ही राष्ट्रपति इसे सामान्य बता रहे हों, लेकिन जमीन पर आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। AAA (American Automobile Association) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एक गैलन रेगुलर गैस की औसत कीमत $3.981 तक पहुंच गई है, जो $4 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब है। पिछले एक महीने में ही कीमतों में $1 का उछाल आया है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले बढ़ती महंगाई रिपब्लिकन पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकती है। हालांकि, ट्रंप ने भरोसा जताया कि कीमतें थोड़ी और बढ़कर वापस पुराने स्तर पर लौट आएंगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य और शुक्रवार की डेडलाइन: ट्रंप के बदले सुर

होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तय की गई शुक्रवार की डेडलाइन पर ट्रंप अब नरम पड़ते दिख रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस समय सीमा का सख्ती से पालन करवाएंगे, तो उन्होंने कहा, “मुझे अभी पक्का नहीं पता।” ट्रंप ने पूरी जिम्मेदारी अपनी कोर टीम यानी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पर छोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ती दिखी, तो वह इस डेडलाइन को आगे भी बढ़ा सकते हैं।

कूटनीति या दबाव की राजनीति?

यह डेडलाइन असल में पिछले सोमवार को ही खत्म हो चुकी थी, लेकिन कूटनीतिक रास्तों को खुला रखने के लिए इसे शुक्रवार तक बढ़ाया गया था। अब ट्रंप के ताजा संकेतों से साफ है कि अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में है। अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार के फैसले पर टिकी हैं कि क्या ईरान झुकता है या तेल की सप्लाई लाइन पर संकट और गहराता है।

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