नई दिल्ली/इस्लामाबाद। ईरान-इजरायल तनाव के बीच जहां पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, वहीं अब अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के बीच ‘मिसाइल वॉर’ की आहट ने रणनीतिक हलचल तेज कर दी है। पाकिस्तान द्वारा मिसाइल टेस्टिंग के लिए नोटिस जारी करने के ठीक बाद, भारत ने भी अरब सागर में उससे दोगुने बड़े दायरे को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित कर दिया है।
एशिया से यूरोप तक एनर्जी सप्लाई चेन चरमराने के बीच, भारत-पाकिस्तान की यह समानांतर सैन्य गतिविधियां वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों के लिए चर्चा का केंद्र बन गई हैं।
पाकिस्तान की 200 किमी की चुनौती, भारत का 400 किमी का जवाब
आधिकारिक सूचनाओं और नोटम (NOTAM – Notice to Airmen) के मुताबिक, पाकिस्तान ने पहले अपनी मिसाइल टेस्टिंग के लिए 20 अप्रैल सुबह 3 बजे से 21 अप्रैल दोपहर 3 बजे तक का समय तय किया था। पाकिस्तान का परीक्षण क्षेत्र करीब 200 किलोमीटर तक फैला है।
पाकिस्तान की इस घोषणा के तुरंत बाद भारत ने अपनी ताकत का अहसास कराते हुए 22 अप्रैल से 25 अप्रैल तक के लिए नया अलर्ट जारी किया। भारत ने अरब सागर में करीब 400 किलोमीटर का दायरा सुरक्षित किया है, जो पाकिस्तान के परीक्षण क्षेत्र से दोगुना बड़ा है। यह बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य अभ्यास की ओर साफ इशारा करता है।
अंडमान के बाद अब अरब सागर में ‘मिसाइल गर्जना’
भारत की यह सक्रियता केवल अरब सागर तक सीमित नहीं है। कुछ सप्ताह पहले भारत ने अंडमान सागर क्षेत्र में भी 1500 से 3500 किलोमीटर की रेंज के लिए नोटम जारी किया था। अब अरब सागर में मिसाइल टेस्टिंग और नो-फ्लाई जोन का नोटिस जारी करना भारत की बढ़ती सैन्य तैयारियों और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
समंदर में तैनात हुआ ‘ध्रुव’, सतर्क हुए दोनों देश
मिसाइल परीक्षणों के बीच अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियों में भी भारी इजाफा हुआ है।
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भारत की तैयारी: भारत ने अरब सागर में अपने अत्याधुनिक मिसाइल ट्रैकिंग और सर्विलांस पोत ‘INS ध्रुव’ को तैनात कर दिया है, जो दुश्मन की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने में सक्षम है।
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पाकिस्तान की हलचल: इस बीच पाकिस्तानी नौसेना के फ्रिगेट्स श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि दोनों देश परमाणु क्षमता से लैस हैं और ये परीक्षण पूर्व-निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत होते हैं, लेकिन ईरान संकट के समय इनका एक साथ होना क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।
आम नागरिक और जहाजों के लिए चेतावनी
समुद्री एडवाइजरी और नोटम आमतौर पर नागरिक विमानों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रखने के लिए जारी किए जाते हैं। 20 से 25 अप्रैल के बीच अरब सागर के प्रभावित क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों को अपना मार्ग बदलने या सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सैन्य अभ्यास के दौरान किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
ईरान जंग की वजह से पहले ही वैश्विक सप्लाई चेन संकट में है, ऐसे में अरब सागर में भारत और पाकिस्तान की यह ‘मिसाइल डिप्लोमेसी’ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा सकती है।
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