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मिडिल ईस्ट में खलबली: क्या अमेरिका को ठेंगा दिखाकर ईरान को हथियार दे रहा चीन? तेहरान में 4 ‘रहस्यमयी’ विमानों की लैंडिंग से हड़कंप

नई दिल्ली/बीजिंग/तेहरान: पश्चिम एशिया के धधकते हालातों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर वायरल हो रहे दावों ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। मशहूर कमेंटेटर मारियो नॉफाल के एक पोस्ट के अनुसार, चीन के चार विशालकाय कार्गो विमानों ने पिछले 48 घंटों के भीतर ईरान की धरती पर लैंडिंग की है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन विमानों ने उड़ान भरने के तुरंत बाद अपने ‘ट्रांसपोंडर’ बंद कर दिए थे, ताकि इन्हें रडार या रीयल-टाइम में ट्रैक न किया जा सके।

रडार से क्यों गायब हुए चीनी विमान?

एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी कमर्शियल या कार्गो विमान के लिए ट्रांसपोंडर बंद करना कोई सामान्य घटना नहीं है। आमतौर पर ऐसा तभी किया जाता है जब किसी मिशन को पूरी तरह गोपनीय या ‘डार्क’ रखना हो। सोशल मीडिया पर अब यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या चीन इन विमानों के जरिए ईरान को हथियारों की बड़ी खेप पहुंचा रहा है? हालांकि, अब तक किसी भी देश की सरकार या स्वतंत्र संस्था ने इन ‘डार्क फ्लाइट्स’ की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

चीन की दो टूक: ‘ये सब बकवास और काल्पनिक है’

इन आरोपों पर ड्रैगन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सैटेलाइट डेटा के आधार पर लगाए जा रहे ये आरोप पूरी तरह काल्पनिक और बेबुनियाद हैं। जियान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन झूठे दावों के आधार पर बीजिंग के खिलाफ कोई भी कदम उठाया गया, तो चीन इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि चीन ने हाल ही में अमेरिका को भरोसा दिलाया था कि वह ईरान को किसी भी तरह की सैन्य मदद नहीं देगा।

अमेरिका की टेढ़ी नजर और प्रतिबंधों की तलवार

भले ही चीन इन आरोपों को नकार रहा हो, लेकिन वाशिंगटन इस हलचल को लेकर बेहद सतर्क है। अमेरिका ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर कोई भी देश ईरान को सैन्य सहायता प्रदान करता हुआ पाया गया, तो उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ चार विमानों का ट्रांसपोंडर बंद करना और वह भी युद्ध जैसे संवेदनशील समय में, शक के घेरे को और गहरा कर देता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और बदलती कूटनीति

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब लेबनान में सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से खोल दिया गया है और अमेरिका-ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की सुगबुगाहट है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ये रहस्यमयी चीनी उड़ानें मध्य पूर्व की शांति की कोशिशों में बाधा बनेंगी या फिर यह किसी बड़े सैन्य गठबंधन की नई शुरुआत है? पूरी दुनिया की नजरें अब इस ‘मिस्ट्री लैंडिंग’ के पीछे छिपे सच पर टिकी हैं।

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