Thursday , 14 May 2026

विजय मिश्रा को 46 साल बाद मिली ‘पाप की सजा’: कोर्ट परिसर में छात्र की हत्या मामले में उम्रकैद, 77 मुकदमों वाले ‘बाहुबली’ का किला ढहा

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत के गठजोड़ का चेहरा रहे पूर्व बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के साम्राज्य पर कानून का अंतिम प्रहार हुआ है। प्रयागराज की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने 46 साल पुराने एक सनसनीखेज हत्याकांड में विजय मिश्रा समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ज्ञानपुर सीट से चार बार विधायक रहे विजय मिश्रा के लिए यह फैसला उनके आपराधिक इतिहास के अंत की ओर एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र की कोर्ट में की थी हत्या

यह मामला 11 फरवरी 1980 का है, जिसने उस दौर में पूरे इलाहाबाद (अब प्रयागराज) को दहला दिया था। यूनिवर्सिटी छात्र प्रकाश नारायण पांडेय किसी काम से जिला अदालत परिसर पहुंचे थे। आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते विजय मिश्रा अपने साथियों जीत नारायण, संतराम और बलराम के साथ वहां पहुंचा और सरेआम अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस दुस्साहसिक हमले में प्रकाश नारायण की मौके पर ही मौत हो गई थी और पांच अन्य लोग लहूलुहान हुए थे।

अदालत का कड़ा रुख: उम्रकैद के साथ भारी जुर्माना

विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार तिवारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चारों दोषियों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने सभी को उम्रकैद के साथ-साथ निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • जुर्माना: चारों दोषियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

  • अतिरिक्त सजा: हत्या के प्रयास (धारा 307) के लिए 10 साल की अतिरिक्त सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

  • संदेश: अदालत ने साफ किया कि रसूख और समय की ओट में छिपकर कानून से बचा नहीं जा सकता।

गायब कर दी गई थी केस की फाइल

इस मामले की सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि विजय मिश्रा के प्रभाव के चलते केस की मूल पत्रावली (फाइल) तक गायब करवा दी गई थी। करीब चार दशक तक चले इस कानूनी संघर्ष में कई बार गवाहों को डराने और केस को कमजोर करने की कोशिशें हुईं। हालांकि, अंततः सरकारी पक्ष की प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों के आधार पर इंसाफ की जीत हुई।

सफेदपोश माफिया की 77 मुकदमों वाली ‘कुंडली’

विजय मिश्रा का नाम पूर्वांचल में खौफ का पर्याय रहा है। उनके आपराधिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो:

  • कुल मुकदमे: उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण और गैंगस्टर एक्ट समेत 77 से ज्यादा केस दर्ज हैं।

  • कार्यक्षेत्र: प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, मेरठ और यहां तक कि हावड़ा (पश्चिम बंगाल) तक उनके खिलाफ मामले दर्ज रहे हैं।

  • संपत्ति पर चोट: यूपी सरकार उन्हें ‘सफेदपोश माफिया’ घोषित कर चुकी है और अब तक उनकी 1 अरब रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।

आगरा जेल में कटेगी बाकी जिंदगी

वर्तमान में विजय मिश्रा आगरा जेल में बंद हैं। इससे पहले उन्हें एक चर्चित गायिका से दुष्कर्म के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। 1980 से शुरू हुआ यह कानूनी सफर 2026 में आकर अपने अंजाम तक पहुंचा है, जिसने उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों के युग के अवसान की एक और कहानी लिख दी है।

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