लखनऊ। राजधानी के नाका थाना क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रही एक उज्बेकिस्तान की युवती को हिरासत में लिया। शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। युवती का न सिर्फ नाम फर्जी निकला, बल्कि उसके पास से मिला वीजा भी जाली पाया गया है। पुलिस ने विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की कमान संभाल ली है।
सड़क किनारे खड़ी युवती को देख गहराया शक
मामला 21 मार्च की सुबह का है। पानदरीबा स्थित अवध ट्रैवल्स के पास पुलिस गश्त कर रही थी, तभी उनकी नजर एक विदेशी युवती पर पड़ी जो सड़क किनारे संदिग्ध हालत में खड़ी थी। उसे देखकर राहगीर रुकते और कुछ पूछकर आगे बढ़ जाते। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत महिला हेल्प डेस्क से महिला आरक्षी को मौके पर बुलाया। भाषा की दीवार के कारण शुरुआत में युवती से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। उसने अपना नाम ‘मुबीना’ बताया और खुद को उज्बेकिस्तान की निवासी बताया।
फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन से खुली पोल
पुलिस युवती को मिशन शक्ति केंद्र ले गई और एलआईयू (LIU) व एफआरआरओ (FRRO) को इसकी सूचना दी। खुफिया एजेंसियों की टीम ने युवती के फिंगरप्रिंट, फोटो और रेटिना स्कैन के जरिए उसकी असलियत जानने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद भी जब वह अपना भारत आने का सही कारण नहीं बता सकी, तो उसे सुरक्षा के लिहाज से कृष्णानगर स्थित वन स्टॉप सेंटर में रखा गया।
उज्बेकिस्तान दूतावास ने किया असली नाम का खुलासा
पुलिस ने इस मामले में उज्बेकिस्तान दूतावास से संपर्क साधा। पहले तो युवती ने दूतावास कर्मियों से व्हाट्सऐप कॉल पर सहयोग नहीं किया, लेकिन जब पुलिस ने उसकी फोटो भेजी तो दूतावास ने उसकी पहचान ‘खुजेविया जियोडिया’ (निवासी: खीवा डिस्ट्रिक्ट, खोरजम रीजन) के रूप में होने की संभावना जताई। पुलिस द्वारा बार-बार पासपोर्ट और वीजा मांगे जाने पर भी वह कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सकी।
गहन जांच में जुटी पुलिस: क्या था भारत आने का मकसद?
नाका थाना प्रभारी अभिनव वर्मा के अनुसार, 23 अप्रैल की शाम को युवती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि युवती लखनऊ में कहां रुक रही थी, वह किसके संपर्क में थी और फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत आने का उसका असली मकसद क्या था? उसके पास मिले पासपोर्ट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
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