वाशिंगटन/तेहरान। मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) में कई महीनों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष और बारूद की गूंज के बाद आखिरकार संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनती दिखाई दे रही है। इस पूरे युद्ध के केंद्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) रहा है, जहां से पूरी दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। इस वैश्विक लाइफलाइन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार सार्वजनिक मंचों से हुंकार भर चुके हैं कि ईरान को हर हाल में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना ही पड़ेगा।
याद दिला दें कि युद्ध के चरम पर होने के दौरान ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों से ‘मोटा टोल’ (Toll Tax) वसूलना शुरू कर दिया था, जिस पर भारी वैश्विक विवाद हुआ था। अब अमेरिका द्वारा इस समझौते का ‘फुल टेक्स्ट’ (Full Text) आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक ईरान सरकार की तरफ से इसकी कोई कॉपी या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। लेकिन अमेरिकी दस्तावेज़ की बारीक कानूनी भाषा को खंगालने पर एक ऐसा चौंकाने वाला ‘लीगल लूपहोल’ (कानूनी खामी) सामने आया है, जो राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के बिल्कुल विपरीत ईरान को भविष्य में भी टोल वसूलने का कानूनी हक दे सकता है।
होर्मुज को लेकर आखिर क्या लिखा है समझौते के 5वें पॉइंट में?
अमेरिका और ईरान के बीच तैयार किए गए इस 14 बिंदुओं वाले ऐतिहासिक समझौते के मसौदे (Draft) में सबसे महत्वपूर्ण जिक्र 5वें पॉइंट में किया गया है, जो पूरी तरह होर्मुज स्ट्रेट की तकदीर तय करता है। इस क्लॉज के मुताबिक:
“इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक ( और इसके विपरीत मार्ग में) कमर्शियल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले वाले सामान्य स्तर पर बहाल करने के लिए अगले 30 दिनों के भीतर तुरंत कड़े कदम उठाएगा। इस बहाली प्रक्रिया के दौरान ईरान द्वारा मार्ग में पैदा की गई सभी तकनीकी बाधाओं को हटाने और समुद्र के भीतर बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को पूरी तरह से निष्क्रिय और साफ करने की आवश्यकता को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा।”
दस्तावेज़ के फुल टेक्स्ट में आगे लिखा गया है कि ईरान लागू होने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और होर्मुज स्ट्रेट के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों (Sovereign Rights) के दायरे में रहेगा। वह फारस की खाड़ी के अन्य तटीय पड़ोसी देशों के साथ व्यापक चर्चा करके होर्मुज में भविष्य के प्रशासन (Administration) और समुद्री सेवाओं (Maritime Services) की रूपरेखा तय करने के लिए ओमान सल्तनत के साथ द्विपक्षीय बातचीत का दौर शुरू करेगा।
‘मैरीटाइम सर्विसेज’ के नाम पर क्या भविष्य में टोल वसूल सकता है ईरान?
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और समुद्री मामलों के कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते की बारीक और पेचीदा कानूनी भाषा में ईरान के लिए एक बहुत बड़ा रास्ता छोड़ दिया गया है। समझौते में साफ लिखा है कि ईरान और ओमान मिलकर इस संवेदनशील जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को खुद तय करेंगे।
जानकारों के मुताबिक, यही वो शब्दावली है जिसे ईरान के लिए एक बड़ा ‘लीगल लूपहोल’ माना जा रहा है। इस क्लॉज का इस्तेमाल करके तेहरान प्रशासन भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों से ‘समुद्री सुरक्षा’, ‘नेविगेशन गाइडेंस’ या ‘मैरीटाइम सर्विस चार्ज’ के नाम पर वैध तरीके से भारी-भरकम टोल टैक्स वसूल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो युद्ध के दौरान ईरान ने जो वसूली शुरू की थी, उसे इस समझौते के जरिए एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता मिल जाएगी।
‘हमेशा के लिए टोल फ्री रहेगा होर्मुज’ – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को अपनी एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत के रूप में पेश कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में जंग की शुरुआत के बाद से ही ट्रंप लगातार होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से मुक्त, स्वतंत्र और खुला रखने की वकालत करते आए हैं। हाल ही में व्हाइट हाउस में दिए एक बयान में उन्होंने बेहद आश्वस्त लहजे में कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल से लदे कई विशाल जहाज अब आसानी से निकलने लगे हैं। वे एक सुरक्षित ‘दक्षिणी हाईवे’ से गुजर रहे हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित, साफ-सुथरा और खतरों से मुक्त है। वैश्विक व्यापार के लिए दुनिया में और भी वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी अखबार ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ (The New York Times) को दिए गए अपने एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने डंके की चोट पर दावा किया कि ईरान के साथ हुए इस ऐतिहासिक समझौते के बाद अब यह पूरी तरह से पक्का और सुनिश्चित हो जाएगा कि होर्मुज स्ट्रेट हमेशा-हमेशा के लिए ‘टोल फ्री’ रहेगा और कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय जहाजों से अवैध वसूली नहीं कर पाएगा। अब देखना यह होगा कि समझौते के इस 5वें पॉइंट की व्याख्या आने वाले दिनों में वाशिंगटन और तेहरान किस तरह करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख अमेरिका द्वारा जारी किए गए समझौते के आधिकारिक मसौदे (Full Text) के विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कूटनीतिक संधियों के अंतिम क्रियान्वयन और दोनों देशों की आधिकारिक व्याख्याओं में बदलाव संभव है।
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