वॉशिंगटन/इस्लामाबाद (ब्यूरो)। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता किसी नतीजे पर पहुंचे बिना ही खत्म हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल खाली हाथ अपने देश लौट चुके हैं, लेकिन असली हलचल अब शुरू हुई है। वार्ता विफल होने से आगबबूला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक युद्ध’ का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान की वैसी ही समुद्री नाकेबंदी (Naval Blockade) कर सकते हैं, जैसी उन्होंने कभी वेनेजुएला के खिलाफ की थी।
ट्रूथ सोशल पर ट्रंप का धमाका: ‘अंतिम प्रस्ताव’ ठुकराने का अंजाम
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक लेख साझा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर सुझाया गया है कि अब जबकि ईरान ने समझौते का आखिरी मौका गंवा दिया है, तो ट्रंप के पास उसकी नौसैनिक घेराबंदी करने का विकल्प खुला है। ट्रंप पहले ही ईरान को ‘पाषाण युग’ में वापस भेजने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों का कहना है कि यह रणनीति ईरान के तेल राजस्व की कमर तोड़ देगी, जिससे न केवल ईरान बल्कि चीन और भारत जैसे तेल खरीदार देशों पर भी दबाव बढ़ेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर होगा अमेरिका का ‘टोल नाका’?
लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट के सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी नौसेना के लिए अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर पूर्ण नियंत्रण करना पहले से कहीं ज्यादा आसान है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में इस मार्ग से करीब 10 जहाजों की आवाजाही हुई है, जिसमें एक रूसी टैंकर भी शामिल था।
यदि ट्रंप नाकेबंदी का आदेश देते हैं, तो खार्ग द्वीप या ओमान के पास के संकरे समुद्री रास्तों से गुजरने वाले हर जहाज को अमेरिकी नौसेना से अनुमति लेनी होगी। यह स्थिति वैश्विक व्यापार के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं होगी।
खार्ग द्वीप: ईरान की लाइफलाइन पर कब्जे की योजना?
सेवानिवृत्त जनरल जैक कीन ने एक और घातक रणनीति का सुझाव दिया है। उनके मुताबिक, यदि तनाव बढ़ता है और जंग की स्थिति बनती है, तो अमेरिकी सेना ईरान की अर्थव्यवस्था की धड़कन कहे जाने वाले खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जा कर सकती है या उसे तबाह कर सकती है।
“अगर हम खार्ग के बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण पा लेते हैं, तो ईरान के तेल और उसकी पूरी अर्थव्यवस्था पर हमारी पकड़ मजबूत होगी। यह ईरान पर वह अंतिम दबाव होगा, जिससे हम न केवल उनके समृद्ध यूरेनियम भंडार को जब्त कर पाएंगे, बल्कि उनके परमाणु केंद्रों को भी हमेशा के लिए खत्म कर सकेंगे।” – जैक कीन, सेवानिवृत्त जनरल
क्या काम करेगी ट्रंप की ‘वेनेजुएला रणनीति’?
ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में वेनेजुएला के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी का सफल प्रयोग किया था, जिसने वहां की सरकार को घुटनों पर ला दिया था। अब वही दांव ईरान पर आजमाने की तैयारी है। इस कदम से ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है। हालांकि, ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे भी शांत नहीं बैठेंगे। ऐसे में दुनिया एक और बड़े युद्ध की कगार पर खड़ी नजर आ रही है।
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