सीकर/जयपुर। देशभर के 23 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ी NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने और सीबीआई जांच शुरू होने के पीछे एक ऐसी कहानी है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस महा-घोटाले का पर्दाफाश किसी हाई-टेक सर्विलांस से नहीं, बल्कि राजस्थान के सीकर में एक हॉस्टल चलाने वाले पिता और उनके एमबीबीएस (MBBS) बेटे की छोटी सी टिप-ऑफ से हुआ। अनजाने में मिला एक ‘गेस पेपर’ अंततः उस धागे की तरह निकला, जिसे खींचते ही पूरे देश में फैला चीटिंग रैकेट बेनकाब हो गया।
केरल से सीकर पहुंचा ‘गेस पेपर’ का संदेश
घटनाक्रम की शुरुआत 2 मई की रात करीब 11 बजे हुई। केरल में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे सीकर के एक छात्र को उसके दोस्त ने व्हाट्सऐप पर एक पीडीएफ (PDF) फाइल भेजी। दोस्त ने इसे ‘गेस पेपर’ बताया था। छात्र ने वह फाइल अपने पिता को फॉरवर्ड कर दी, जो सीकर में कोचिंग करने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल चलाते हैं। बेटे ने सिर्फ इतना मैसेज छोड़ा था कि यदि हॉस्टल की लड़कियां जगी हों, तो शायद यह उनके काम आ जाए। हालांकि, तब तक पिता सो चुके थे और सुबह जब वे जागे, तो छात्राएं परीक्षा केंद्र के लिए निकल चुकी थीं।
केमिस्ट्री और बायोलॉजी शिक्षकों ने जब मिलाया पेपर तो उड़े होश
3 मई को परीक्षा संपन्न होने के बाद हॉस्टल मालिक ने कौतूहलवश वह पीडीएफ अपने एक परिचित केमिस्ट्री शिक्षक को भेजा। जब शिक्षक ने असली प्रश्नपत्र से उसकी तुलना की, तो वह दंग रह गया—108 में से 45 सवाल हूबहू वही थे। इसके बाद बायोलॉजी के एक शिक्षक को बुलाया गया। गहन मिलान के बाद पता चला कि कुल 204 सवालों में से 135 सवाल (करीब 66%) उस तथाकथित गेस पेपर से हूबहू मेल खा रहे थे। यह महज संयोग नहीं, बल्कि पेपर लीक का पुख्ता प्रमाण था।
स्थानीय पुलिस ने शिकायत लेने से किया इनकार
हॉस्टल मालिक और शिक्षक जब इस गंभीर सुराग के साथ सीकर की स्थानीय पुलिस के पास पहुंचे, तो पुलिस का रवैया निराशाजनक रहा। पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि “परीक्षा खत्म होने के बाद शिकायत करना संदिग्ध है।” पुलिस को लगा कि शायद वे परीक्षा रद्द कराने की साजिश रच रहे हैं। पुलिस का तर्क था कि यदि लीक की खबर थी, तो परीक्षा से पहले आनी चाहिए थी।
NTA को भेजा ईमेल और शुरू हुई SOG की कार्रवाई
पुलिस की बेरुखी के बाद भी हॉस्टल मालिक और शिक्षक पीछे नहीं हटे। उन्होंने सीधे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को साक्ष्यों के साथ ईमेल भेजा। करीब चार दिन बाद, 8 मई को एनटीए ने इस मामले को गंभीरता से लिया और राजस्थान एसओजी (SOG) को जांच सौंपी। एसओजी ने हॉस्टल मालिक के फोन और व्हाट्सऐप विवरण की जांच की, जिससे घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला की पुष्टि हो गई।
हरियाणा से महाराष्ट्र तक खुला पेपर लीक का जाल
जैसे ही एसओजी ने जांच का दायरा बढ़ाया, चौंकाने वाले खुलासे हुए:
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जयपुर कनेक्शन: जांच जमवारामगढ़ पहुंची, जहां दो भाइयों ने सीकर के एक संपर्क को यह पेपर बेचा था।
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हरियाणा का नेटवर्क: इन भाइयों ने एसओजी को हरियाणा के एक आयुर्वेद छात्र तक पहुंचाया, जिसने बिहार, जम्मू-कश्मीर और दक्षिण भारत के राज्यों में पेपर बेचा था।
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नासिक का मास्टरमाइंड: आखिरकार सुराग महाराष्ट्र के नासिक पहुंचा, जहां शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया गया। शुभम के पास से उस ‘गेस पेपर’ की वास्तविक हार्ड कॉपी बरामद हुई, जिसने इस पूरे रैकेट की पुष्टि कर दी।
वर्तमान में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के पास है। सीकर के उस हॉस्टल मालिक की एक सजग कोशिश ने न केवल व्यवस्था की खामियों को उजागर किया, बल्कि लाखों ईमानदार छात्रों की आवाज को न्याय की दहलीज तक पहुंचाया।
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