Sunday , 26 April 2026

पेट्रोल की कीमतों से मिलेगी राहत! सरकार इस साल के अंत तक लॉन्च करेगी E85 ईंधन; जानें आपकी जेब और कार पर असर !

नई दिल्ली: भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस साल के अंत तक E85 पेट्रोल (85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल) को देशभर में रोलआउट करने की पूरी तैयारी कर ली है। यह कदम न केवल कच्चे तेल के महंगे आयात को कम करेगा, बल्कि अन्नदाता किसानों को ‘ऊर्जादाता’ बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

क्या है E85 पेट्रोल और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक?

E85 एक उच्च-इथेनॉल मिश्रण है, जिसमें 85 फीसदी हिस्सा बायो-फ्यूल (इथेनॉल) का होता है। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFVs) तैयार किए जा रहे हैं। इन वाहनों की खासियत यह है कि इनके ‘ऑनबोर्ड सेंसर्स’ फ्यूल के मिश्रण को खुद पहचान लेते हैं और इंजन के इग्निशन को उसी के अनुसार एडजस्ट कर देते हैं। ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने सरकार को आश्वस्त किया है कि वे इस तकनीक के साथ बाजार में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

BIS ने तय किए मानक: अब पंप पर मिलेंगे कई विकल्प

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने E85 के लिए कड़े मानक तैयार कर लिए हैं। अप्रैल 2026 से देशभर में E20 पेट्रोल पहले ही अनिवार्य हो चुका है। अब सरकार की मल्टी-फ्यूल पॉलिसी के तहत ग्राहकों को पेट्रोल पंपों पर अपनी पसंद और वाहन की क्षमता के अनुसार E20, E25, E85 जैसे कई विकल्प मिलेंगे। 30 अप्रैल तक E22 और E26 जैसे अन्य मिश्रणों के मानक भी जारी होने की उम्मीद है।

E100 के बजाय E85 ही क्यों? समझें इसके पीछे का विज्ञान

विशेषज्ञों का मानना है कि 100% इथेनॉल (E100) के मुकाबले E85 अधिक व्यावहारिक है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • कोल्ड स्टार्ट की समस्या: इथेनॉल का वाष्पीकरण बिंदु उच्च होता है, जिससे ठंडे मौसम में इंजन शुरू करने में दिक्कत आती है। 15% पेट्रोल मिलाने से यह समस्या खत्म हो जाती है।

  • ऊर्जा घनत्व (Energy Density): इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले 30-35% कम ऊर्जा होती है। E85 एक ऐसा संतुलन बनाता है जिससे माइलेज और पावर दोनों बरकरार रहते हैं।

  • इंजन की सुरक्षा: E85 मिश्रण इंजन में जंग (Corrosion) कम लगने देता है और पाइप्स व रबर पार्ट्स के साथ बेहतर तालमेल बिठाता है।

विदेशी मॉडल और भारत की ताकत: ब्राजील से सीख

ब्राजील दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने 2003 में ही फ्लेक्स-फ्यूल प्रोग्राम शुरू किया था। वहां आज अधिकांश कारें उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलती हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन में 90 फीसदी तक की कमी आई है। भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है, गन्ने के सह-उत्पाद (मैसेस) से बड़ी मात्रा में इथेनॉल बनाकर इस वैश्विक दौड़ में अग्रणी बन सकता है।

अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को ‘डबल फायदा’

इस पहल से भारत को सालाना करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल रही है। जैसे-जैसे E85 का चलन बढ़ेगा, यह बचत और भी ज्यादा होगी। साथ ही, यह पर्यावरण के लिए भी संजीवनी है क्योंकि इथेनॉल जलने पर फॉसिल फ्यूल के मुकाबले बहुत कम जहरीली गैसें छोड़ता है।

Check Also

Bank Holiday Alert: अगले हफ्ते इतने दिन बंद रहेंगे बैंक, 1 मई से पहले निपटा लें जरूरी काम; अगले महीने छुट्टियों की लंबी लिस्ट

नई दिल्ली: अगर आपके पास बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, जैसे चेक क्लियरेंस, …