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बंगाल का ‘महासंग्राम’ निर्णायक मोड़ पर: थम गया अंतिम चरण का शोर, 142 सीटों पर ‘आर-पार’ की जंग….क्या टूटेगा पहले चरण का रिकॉर्ड?

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ता के सिंहासन का फैसला अब बेहद करीब है। विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए सोमवार शाम को चुनाव प्रचार का शोर थम गया। अब बारी मतदाताओं की है, जो 29 अप्रैल को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक राज्य की शेष 142 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद करेंगे। पहले चरण में हुई छिटपुट हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए हैं कि परिंदा भी पर न मार सके।

सुरक्षा का अभेद्य किला: 2300 से ज्यादा कंपनियां तैनात

23 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान उपजे तनाव को देखते हुए इस अंतिम चरण के लिए सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना बढ़ा दिया गया है। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,348 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। इसमें सबसे अधिक संवेदनशीलता उत्तर 24 परगना जिले में देखी जा रही है, जहाँ अकेले 507 कंपनियां मोर्चे पर रहेंगी। बांग्लादेश सीमा और सुंदरबन के तटीय इलाकों में विशेष गश्त के निर्देश दिए गए हैं ताकि घुसपैठ या बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश न रहे।

मैदान में दिग्गज: मोदी, शाह और योगी ने झोंकी ताकत

प्रचार के आखिरी दिन भाजपा ने अपनी पूरी ताकत बंगाल की गलियों में उतार दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बैरकपुर में विशाल जनसभा कर परिवर्तन का आह्वान किया, तो वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने बेहाला और हुगली में मेगा रोड शो के जरिए जनसैलाब उमड़ाया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कल्याणी से लेकर दमदम तक धुआंधार प्रचार किया। भाजपा के इन दिग्गजों ने कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर ममता सरकार को जमकर घेरा।

दीदी का पलटवार: जादवपुर से भवानीपुर तक हुंकार

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी सत्ता बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। उन्होंने जादवपुर में जनसभा मार्च निकालकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया और शाम होते-होते अपने गृह क्षेत्र भवानीपुर में जनता से संवाद किया। टीएमसी के रणनीतिकार अभिषेक बनर्जी ने भी नादिया और हुगली के इलाकों में ताबड़तोड़ रैलियां कर बंगाल की अस्मिता का कार्ड खेला।

93.19% मतदान ने उड़ाई राजनीतिक दलों की नींद

पहले चरण में हुए ऐतिहासिक 93.19 प्रतिशत मतदान ने सभी राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। इतने भारी मतदान को अक्सर सत्ता विरोधी लहर या फिर जबरदस्त लहर के तौर पर देखा जाता है। इसी उत्साह को देखते हुए दूसरे चरण में भी भारी मतदान की उम्मीद है। कोलकाता, हावड़ा, नादिया और हुगली जैसे महत्वपूर्ण जिलों की ये 142 सीटें ही तय करेंगी कि ‘नवान्न’ (सचिवालय) में कौन बैठेगा।

4 मई को होगा महाफैसला: बंगाल के साथ 4 राज्यों के नतीजे

29 अप्रैल को वोटिंग खत्म होने के बाद सबकी नजरें 4 मई पर टिक जाएंगी। इसी दिन न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम भी घोषित किए जाएंगे। बंगाल का यह चुनावी ‘खेला’ अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, जहाँ सुरक्षा, शांति और भारी मतदान के बीच लोकतंत्र का सबसे बड़ा परिणाम निकलने वाला है।

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