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बंगाल का महासंग्राम: 10 सीटें जो तय करेंगी सत्ता का भविष्य; भवानीपुर में दीदी-दादा की सीधी भिड़ंत, नंदीग्राम में साख की लड़ाई

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सियासी इतिहास में आज 4 मई का दिन ‘सुपर मंडे’ साबित होने वाला है। सूबे की 293 विधानसभा सीटों पर वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है और रुझान आने भी लगे हैं। इस बार का चुनाव महज सत्ता की कुर्सी का नहीं, बल्कि अस्मिता और वर्चस्व की वह जंग है जिसने बंगाल को दो खेमों में बांट दिया है। कहीं हिंसा, कहीं मतदाता सूची से नाम कटने के आरोप तो कहीं आरजी कर कांड का आक्रोश—इस चुनाव ने हर वो रंग देखा जो लोकतंत्र को झकझोर देता है। पूरे राज्य की नजरें उन 10 वीआईपी सीटों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि ‘खेला’ किसका होगा।

भवानीपुर: ममता बनर्जी के किले में सुवेंदु की सेंध?

सबसे हॉट सीट भवानीपुर में मुकाबला अब ‘पर्सनल’ हो चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने इस परंपरागत गढ़ से चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन भाजपा ने उनके पूर्व सिपहसालार सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारकर इस लड़ाई को बेहद दिलचस्प बना दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस सीट से मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 47,000 से ज्यादा नाम काटे गए थे, जिसका असर नतीजों पर पड़ना तय है। क्या दीदी अपना किला बचा पाएंगी या सुवेंदु एक और बड़ा उलटफेर करेंगे?

नंदीग्राम और डायमंड हार्बर: साख और विरासत का इम्तिहान

नंदीग्राम आज भी बंगाल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। 2021 में ममता बनर्जी को यहां सुवेंदु ने मात दी थी, इसलिए टीएमसी के लिए यह सीट ‘प्रतिशोध’ का विषय है। वहीं, डायमंड हार्बर टीएमसी के भविष्य यानी अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र है। अभिषेक के करीबी पन्नालाल हलदर यहां से मैदान में हैं। अगर यहां नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहते, तो यह पार्टी के भावी नेतृत्व (Next-Gen) के लिए बड़ा झटका होगा।

पानीहाटी: इंसाफ की पुकार बना चुनावी मुद्दा

इस चुनाव में पानीहाटी सीट ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना की शिकार बेटी की मां, रत्ना देबनाथ, यहां से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। उनका मुकाबला टीएमसी के निवर्तमान विधायक तीर्थंकर घोष से है। यह सीट अब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक अखाड़ा बन गई है, जहां जनता का वोट ‘इंसाफ’ के नाम पर भी पड़ सकता है।

संदेशखाली और भांगर: गुस्से और तीसरे विकल्प की आजमाइश

संदेशखाली में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भाजपा के लिए सबसे बड़ा हथियार रहा है। वहीं, भांगर में नौशाद सिद्दीकी की ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ (ISF) ने त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है। यहां की हिंसा और राजनीतिक तनाव ने इसे सबसे संवेदनशील सीटों की सूची में सबसे ऊपर रखा है।

औद्योगिक और ऐतिहासिक गढ़ों में मुकाबला

खड़गपुर सदर में दो ‘दादाओं’—दिलीप घोष और प्रदीप सरकार के बीच वर्चस्व की जंग है। मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस अपना पुराना गौरव पाने की कोशिश कर रही है। कोलकाता पोर्ट पर फिरहाद हकीम की साख दांव पर है, तो वहीं बालुरघाट में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और अर्पिता घोष के बीच कांटे की टक्कर है।

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