
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पड़ोसी देश पाकिस्तान का आर्थिक संकट (Economic Crisis) अब उस खौफनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां से वापसी का रास्ता नजर नहीं आ रहा। पाकिस्तान की शाहबाज सरकार ने राजकोषीय घाटे को भरने के नाम पर आम जनता पर टैक्स का इतना बोझ लाद दिया है कि मध्यम वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी दूभर हो गया है। पाकिस्तानी मीडिया में छपे एक हालिया लेख ने देश के खोखले सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है, जिसमें बताया गया है कि कैसे सरकार और जनता के बीच का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।
34 लाख लोगों के कंधे पर पूरे मुल्क का बोझ
पाकिस्तान की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि यहाँ का पूरा खर्च महज 34 लाख टैक्सपेयर्स उठा रहे हैं। यह संख्या देश की कुल वर्कफोर्स का सिर्फ 4 प्रतिशत है। चौंकाने वाला खुलासा यह है कि पाकिस्तान सरकार ने एक तरह से मिडिल क्लास के खिलाफ ‘जंग’ छेड़ दी है। जहाँ देश का रसूखदार और अमीर तबका टैक्स चोरी कर ऐश कर रहा है, वहीं वेतनभोगी वर्ग को भारी घाटे की भरपाई के लिए निचोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सड़ी हुई व्यवस्था ने पाकिस्तान में ‘ईमानदारी को एक अपराध’ बना दिया है।
बिजनेस करना हुआ 34% महंगा, निवेश के लाले
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में व्यापार करना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। दक्षिण एशियाई देशों (South Asian Countries) की तुलना में पाकिस्तान में बिजनेस चलाने का ‘कॉस्ट स्ट्रक्चर’ 34 प्रतिशत ज्यादा महंगा है। कम एक्सपोर्ट, इनोवेशन की कमी और सरकार की अदूरदर्शी नीतियों ने निवेशकों को देश से दूर भगा दिया है। आलम यह है कि जो लोग नया स्टार्टअप या उद्योग शुरू करना चाहते हैं, वे भारी टैक्स और बिजली-पेट्रोल की कीमतों के डर से हाथ पीछे खींच रहे हैं।
मिनी बजट और सुपर टैक्स ने तोड़ी कमर
शाहबाज सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लगातार ‘मिनी बजट’ और ‘सुपर टैक्स’ जैसे आत्मघाती कदम उठा रही है। पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी सेस वसूला जा रहा है, जिससे महंगाई आसमान छू रही है। हालत यह है कि पाकिस्तान का ‘डे्ट-टू-टैक्स’ (Debt-to-tax) रेशियो 700 प्रतिशत के पार जा चुका है। भारी टैक्स देने के बावजूद जनता को बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे सामाजिक आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
दिवालिया होने की कगार पर खड़ा सिस्टम
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यह संकट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि एक पूरे मुल्क के तबाह होने की दास्तान है। सरकार समाज के गरीब तबके को लेकर पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है। विकास कार्य ठप हैं और राजकोष खाली है। अगर पाकिस्तान ने अपने टैक्स सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव नहीं किया और अमीरों पर नकेल नहीं कसी, तो वह दिन दूर नहीं जब यह मुल्क पूरी तरह से आर्थिक मलबे में तब्दील हो जाएगा।
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