Saturday , 30 May 2026

तमिलनाडु का ‘सत्ता संग्राम’: 108 सीटों से जादुई आंकड़े तक, जानें कैसे ‘थ्रिलर’ फिल्म की तरह CM की कुर्सी तक पहुंचे थलपति विजय

चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में पिछले पांच दिनों से जो कुछ भी घटा, वह किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स से कम नहीं था। चुनावी नतीजे आने के बाद ऐसा लग रहा था कि अभिनेता से नेता बने विजय के लिए फोर्ट सेंट जॉर्ज (सचिवालय) की राह बेहद आसान होगी, लेकिन असली चुनौती तो नतीजों के बाद शुरू हुई। ‘118’ के उस जादुई आंकड़े ने विजय को रात भर जगाए रखा और तमिलनाडु की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया, जहां हर पल समीकरण बदल रहे थे।

जीत के बाद शुरू हुई विजय की असली अग्निपरीक्षा

4 मई को जब ईवीएम खुली तो विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। समर्थकों ने इसे ‘नया सूर्योदय’ करार दिया, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से विजय 10 कदम दूर रह गए। यहीं से शुरू हुआ जोड़-तोड़ और बैकडोर मुलाकातों का वह सिलसिला, जिसने चेन्नई से लेकर दिल्ली तक हलचल पैदा कर दी। विजय के लिए यह महज चुनाव जीतना नहीं, बल्कि गठबंधन की राजनीति की पहली और सबसे कठिन परीक्षा थी।

जब ‘किंगमेकर’ की चुप्पी ने बढ़ाई धड़कनें

सत्ता की इस शतरंज में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब कांग्रेस ने 5 विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने का इशारा किया। इसके बाद CPI और CPM भी साथ आ गए, लेकिन पेंच फंस गया VCK प्रमुख थोल तिरुमावलवन के पास। उनके दो विधायकों का समर्थन ही विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा सकता था। VCK की रहस्यमयी चुप्पी ने इस पूरे राजनीतिक थ्रिलर में सस्पेंस को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।

पुडुचेरी के रिसॉर्ट और ‘दुश्मनों’ का गठबंधन

सियासी गलियारों में चर्चाएं आम थीं कि क्या विजय को रोकने के लिए पुराने दुश्मन DMK और AIADMK एक साथ आ सकते हैं? इसी डर के बीच AIADMK ने अपने विधायकों को पुडुचेरी के रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया। रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के इस खेल ने बता दिया कि तमिलनाडु की राजनीति में आज भी पुराने दिग्गज हार मानने को तैयार नहीं हैं। AIADMK की ओर से डिप्टी सीएम और मलाईदार मंत्रालयों की मांग ने सौदेबाजी को और पेचीदा बना दिया था।

राज्यपाल की दहलीज और आधी रात का वो सस्पेंस

विजय तीन दिनों तक लगातार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलते रहे, लेकिन बहुमत का पुख्ता प्रमाण न होने के कारण न्योता टलता रहा। शुक्रवार रात तक TVK के पास 117 विधायकों का समर्थन था—बहुमत से सिर्फ एक कम। जब IUML ने हाथ खींच लिए, तो TVK खेमे में बेचैनी साफ दिखने लगी। चेन्नई की सड़कों पर सन्नाटा था, लेकिन विजय के दफ्तर में फोन की घंटियां और बंद कमरों की बैठकें थमने का नाम नहीं ले रही थीं।

क्लाइमेक्स: शनिवार की वो सुबह और विजय का राजतिलक

शनिवार को आखिरकार सस्पेंस खत्म हुआ जब VCK ने बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया। देखते ही देखते IUML भी पाले में आ गई। विजय (जिन्होंने दो सीटों से चुनाव जीता था, एक सीट छोड़ने के बाद 107) के पास अब कांग्रेस, वामदल, VCK और IUML को मिलाकर कुल 120 विधायकों का अटूट समर्थन था। राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने का न्योता दिया और अब 10 मई की सुबह 10 बजे चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

तमिलनाडु में अब एक नए युग की शुरुआत हो रही है। विजय ने अपनी पहली ही फिल्मनुमा सियासी जंग जीत ली है, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी—क्या वह अपनी फिल्मी लोकप्रियता को एक सफल शासन में बदल पाएंगे? 13 मई को उन्हें विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा, जो उनके राजनीतिक करियर का पहला आधिकारिक टेस्ट होगा।

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