Saturday , 18 April 2026

कन्नौज में सपा की इफ्तार पार्टी या 2027 का शक्ति प्रदर्शन? इरफान सोलंकी के ‘जेल के दर्द’ ने माहौल किया भावुक !

कन्नौज: रविवार को बाबा हाजी शरीफ दरगाह ग्राउंड का नजारा किसी राजनीतिक जलसे से कहीं अधिक ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ के कोलाज जैसा नजर आया। समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित इस इफ्तार पार्टी में एक तरफ इबादत की खुशबू थी, तो दूसरी तरफ 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बिछती राजनीतिक बिसात। खजूर से रोजा खोलते हाथों के बीच ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का वो नारा गूंजा, जिसे सपा अपना सबसे मजबूत चुनावी कवच मान रही है।

इरफान सोलंकी का छलका दर्द: “अल्लाह दुश्मन को भी जेल न भेजे”

इफ्तार के बाद जब सीसामऊ के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी मंच पर आए, तो उनकी बातों ने वहां मौजूद हजारों लोगों को सन्न कर दिया। जेल के दिनों को याद करते हुए सोलंकी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “जेल की दुनिया खौफनाक है, अल्लाह दुश्मन को भी उस नर्क में न भेजे।” उन्होंने न केवल अपनी बल्कि आजम खान की रिहाई के लिए भी दुआ मांगी। हालांकि, इस भावुकता के बीच उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए गैस किल्लत और महंगाई के मुद्दे पर पीएम और सीएम से इस्तीफे तक की मांग कर डाली।

“पीडीए” का सैलाब पलटेगा 2027 में सत्ता का तख्ता

मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष अनीस राजा ने मंच से सीधे ‘मिशन 2027’ का बिगुल फूंका। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि पीडीए अब सिर्फ एक गठबंधन नहीं बल्कि एक ऐसा सैलाब बन चुका है जिसे कोई रोक नहीं पाएगा। उन्होंने अखिलेश यादव की सोच को आगे बढ़ाते हुए व्यवस्था परिवर्तन का आह्वान किया। समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष हसीब हसन के कुशल संचालन ने इस आयोजन को एक सूत्र में पिरोए रखा।

एकजुट दिखी ‘सपा ब्रिगेड’, दिग्गजों का लगा जमावड़ा

इस इफ्तार पार्टी में सपा का हर छोटा-बड़ा सिपाही कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा दिखा। जिलाध्यक्ष मो. कलीम खान, वरिष्ठ नेता जय कुमार तिवारी ‘बऊअन’, पूर्व विधायक अरविंद यादव और कल्याण सिंह दोहरे जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने पार्टी की एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तहसीन सिद्दीकी, सदर हाजी शरीफ और पी. पी. सिंह वघेल सहित हजारों की संख्या में रोजेदार और कार्यकर्ता शरीक हुए, जिससे पूरा ग्राउंड सपा के रंग में रंगा नजर आया।

इबादत के बीच सियासत की नई इबारत

राजनीतिक जानकारों की मानें तो कन्नौज की यह इफ्तार पार्टी महज एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि जमीन पर कैडर को सक्रिय करने की एक कोशिश थी। अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पैठ मजबूत करने और दलित-पिछड़ों को एक मंच पर लाने का जो ‘कन्नौज मॉडल’ यहाँ दिखा, वह आने वाले दिनों में यूपी की सियासत में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।


 

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