
सीतापुर: सात समंदर पार रोजी-रोटी कमाने गए सीतापुर के लाल रवि गोपाल की वापसी तो हुई, लेकिन तिरंगे में लिपटे ताबूत में। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुए भीषण मिसाइल हमले में असमय काल के गाल में समाए रवि गोपाल का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके पैतृक गांव बघाइन पहुंचा। जैसे ही एम्बुलेंस गांव की सीमा में दाखिल हुई, पूरे क्षेत्र में मातमी सन्नाटा पसर गया। करीब एक सप्ताह के लंबे और पथराई आंखों से किए गए इंतजार के बाद अपने लाडले का बेजान शरीर देख परिजनों का कलेजा मुंह को आ गया।
गांव की सीमा में एम्बुलेंस घुसते ही मचा कोहराम, नम हुई हर आंख
बघाइन गांव में बुधवार का सूरज मातम की चादर ओढ़कर निकला। रवि गोपाल के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के दर्जनों गांवों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर चेहरे पर दुख और उस मंजर की दहशत साफ दिख रही थी, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार का सहारा छीन लिया। प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच महमूदाबाद के नायब तहसीलदार ने लखनऊ एयरपोर्ट से शव को रिसीव किया और ससम्मान गांव तक पहुंचाया। मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा, वहीं अधिकारियों ने बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाने की कोशिश की।
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी पहुंचे बघाइन, परिजनों से साझा किया दुख
इस दुखद घड़ी में राजनीति और सामाजिक जगत के लोग भी पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने पहुंचे। पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने बघाइन गांव पहुंचकर शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि रवि अपने परिवार की उम्मीदों का केंद्र था। डॉ. रिजवी ने मौके से ही परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनके भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की।
मुख्यमंत्री को पत्र: 1 करोड़ का मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
डॉ. अम्मार रिजवी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता (मुआवजा) प्रदान की जाए। इसके साथ ही, परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी देने की भी पुरजोर वकालत की गई है। उन्होंने सरकार से अपील की कि अंतरराष्ट्रीय आपदा का शिकार हुए इस गरीब परिवार को लावारिस न छोड़ा जाए और हर संभव सरकारी मदद तत्काल मुहैया कराई जाए।
गमगीन माहौल में अंतिम विदाई, देर शाम होगा अंतिम संस्कार
खबर लिखे जाने तक गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की जा चुकी थीं। देर शाम स्थानीय जनप्रतिनिधियों और हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में रवि गोपाल का अंतिम संस्कार पैतृक घाट पर किया जाएगा। पूरा इलाका आज अपने उस जांबाज बेटे की विदाई में डूबा है, जो परिवार की गरीबी दूर करने के लिए परदेस गया था, लेकिन युद्ध और हिंसा की भेंट चढ़ गया।
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