नई दिल्ली/मुंबई। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के करोड़ों ग्राहकों के लिए बेहद जरूरी और अलर्ट करने वाली खबर है। अगर आपके पास बैंक की शाखा (Branch) से जुड़ा कोई भी जरूरी काम जैसे- चेक क्लियरिंग, कैश डिपॉजिट या पासबुक अपडेट आदि बचा है, तो उसे आज यानी 22 मई, शुक्रवार को ही हर हाल में निपटा लें। ऐसा न करने पर आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कल यानी 23 मई से लेकर 28 मई 2026 तक लगातार 6 दिनों के लिए एसबीआई की शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रह सकता है।
दरअसल, अगले 6 दिनों तक बैंक बंद रहने के पीछे वीकेंड की छुट्टियां, त्योहार और स्टेट बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी दो दिवसीय प्रस्तावित हड़ताल एक साथ होना है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर मई के इस आखिरी हफ्ते में बैंकों के ताले क्यों बंद रहने वाले हैं।
जानिए क्यों 23 से 28 मई के बीच बंद रहेंगे SBI बैंक
आगामी 23 मई से 28 मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में एसबीआई का कामकाज प्रभावित होने वाला है। इसके पीछे कैलेंडर की छुट्टियां और कर्मचारियों का आक्रोश दोनों ही मुख्य वजह हैं:
1. वीकेंड की छुट्टियां (23 और 24 मई): नियम के मुताबिक देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। इस बार 23 मई को महीने का चौथा शनिवार है और 24 मई को रविवार है। इस वजह से इन दो दिनों में बैंक बंद रहेंगे।
2. SBI स्टाफ की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल (25 और 26 मई): वीकेंड खत्म होते ही सोमवार (25 मई) और मंगलवार (26 मई) को ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने अपनी कई लंबित मांगों को लेकर देशभर में दो दिनों की बड़ी हड़ताल का प्रस्ताव दिया है। इसके चलते बैंकों का सामान्य कामकाज पूरी तरह प्रभावित होगा।
3. बकरीद (ईद-उल-अजहा) का अवकाश (27 और 28 मई): भारत के अलग-अलग राज्यों में बकरीद का त्योहार अलग-अलग दिन मनाए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दो दिनों की छुट्टियां तय की हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में 27 मई को बकरीद के मौके पर एसबीआई बंद रहेगा, जबकि कुछ चुनिंदा हिस्सों में 28 मई को छुट्टी रहेगी। वहीं, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में 27 और 28 मई दोनों ही दिन बैंक बंद रहेंगे।
आखिर क्यों हड़ताल पर जाना चाहते हैं SBI कर्मचारी?
ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने बैंक प्रबंधन के सामने अपनी 16 सूत्री मांगें रखी हैं। फेडरेशन का कहना है कि यह हड़ताल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने, काम करने के माहौल को बेहतर बनाने और अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बुलाई गई है। बैंक प्रबंधन द्वारा मांगों पर विचार न किए जाने के कारण कर्मचारी संगठन ने इस बड़े कदम का ऐलान किया है।
आम जनता पर क्या होगा इस हड़ताल का असर?
चूंकि यह प्रस्तावित हड़ताल मुख्य रूप से ‘वर्कमेन कैटेगरी’ यानी क्लर्क, कैशियर और अन्य सब-स्टाफ की ओर से बुलाई गई है, इसलिए सीधे तौर पर पब्लिक डीलिंग वाले काम ठप हो जाएंगे। ग्राहकों को कैश काउंटर से लेनदेन करने, नए चेक जमा करने, ड्राफ्ट बनवाने और पासबुक प्रिंट कराने जैसी सेवाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, इस दौरान ऑनलाइन बैंकिंग, योनो ऐप (YONO App) और एटीएम (ATM) सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
एसबीआई कर्मचारियों की ये हैं 16 प्रमुख मांगें
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चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती: बैंक में खाली पड़े मेसेंजर्स (चतुर्थ श्रेणी) के पदों पर तुरंत स्थाई और नई भर्ती की जाए।
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सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति: शाखाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पर्याप्त संख्या में आर्म्ड गार्ड्स (सशस्त्र गार्ड) नियुक्त हों।
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NPS में विकल्प की आजादी: नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत आने वाले कर्मचारियों को अपना ‘पेंशन फंड मैनेजर’ चुनने का अधिकार मिले।
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इंटर सर्कल ट्रांसफर (ICT): साल 2019 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को दूसरे सर्कल में ट्रांसफर लेने का मौका दिया जाए।
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आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक: बैंक के स्थाई और रूटीन प्रकृति के कामों को बाहरी एजेंसियों को सौंपना पूरी तरह बंद हो।
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स्टाफ की कमी दूर हो: सभी शाखाओं में बढ़ते काम के दबाव को देखते हुए पर्याप्त संख्या में नए कर्मचारियों की बहाली की जाए।
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वेतन में समानता का मुद्दा: स्टेट बैंक के कर्मचारियों के बीच वेतन और अन्य सुविधाओं में आ रही विसंगतियों व असमानताओं को दूर किया जाए।
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करियर प्रोग्रेशन स्कीम की समीक्षा: कर्मचारियों के प्रमोशन और करियर ग्रोथ से जुड़ी मौजूदा नीतियों में जरूरी सुधार किए जाएं।
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रिटायर्ड कर्मियों को मिले लाभ: 10वें द्विपक्षीय समझौते के तहत सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को ‘8वें स्टैग्नेशन इंक्रीमेंट’ का लाभ दिया जाए।
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कंसल्टेशन चार्ज में सुधार: 15 जुलाई 2024 से लागू किए गए फिजिशियन कंसल्टेशन चार्जेस की समीक्षा कर उसमें कर्मचारियों के हक में बदलाव हो।
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मेडिकल स्कीम का सरलीकरण: बैंक की मेडिकल रिइम्बर्समेंट स्कीम को कर्मचारियों के लिए और अधिक बेहतर तथा सरल बनाया जाए।
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पेंशन में सभी भत्ते जोड़ना: 7वें द्विपक्षीय समझौते के तहत रिटायर हुए कर्मियों की पेंशन की गणना करते समय वेतन के सभी कंपोनेंट्स को शामिल किया जाए।
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HRMS सॉफ्टवेयर की दिक्कतों का हल: बैंक के एचआर सॉफ्टवेयर (HRMS) में लगातार आ रही तकनीकी कमियों को स्थाई रूप से ठीक किया जाए।
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कर्मचारी निदेशक की नियुक्ति: एसबीआई के बोर्ड में वर्कमेन कैटेगरी से एक निदेशक नियुक्त करने की पुरानी गौरवशाली परंपरा को दोबारा बहाल किया जाए।
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PF ट्रस्टी का नामांकन: प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट में कर्मचारियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधि की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
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मिस-सेलिंग पर लगे लगाम: ‘क्रॉस-सेलिंग’ के नाम पर कर्मचारियों पर दबाव बनाकर ग्राहकों को जबरन बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे गलत प्रोडक्ट बेचने का चलन तुरंत बंद किया जाए।
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