Tuesday , 23 June 2026

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: SIT ने 6 दिन की जांच के बाद सौंपी सीक्रेट रिपोर्ट, 8 करोड़ की हेराफेरी में कई कर्मचारियों पर FIR की तैयारी !

अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे और चंदे में हुई करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने आज, 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को दी गई है। हालांकि रिपोर्ट को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, उसने मंदिर प्रशासन से लेकर आरोपियों तक के होश उड़ा दिए हैं।

लखनऊ मंडलायुक्त की अगुवाई वाली SIT ने 6 दिनों तक खंगाला अयोध्या, 60 से ज्यादा लोगों से पूछताछ

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की लिखित मांग और गंभीर चिंता को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस हाई-प्रोफाइल चंदा चोरी मामले की जांच SIT को सौंपी थी। इस जांच टीम की कमान लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत संभाल रहे हैं, जबकि टीम में आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन जैसे तेजतर्रार अधिकारी शामिल हैं।

सोमवार (15 जून) को अयोध्या पहुंचते ही इस टीम ने मंदिर परिसर और ट्रस्ट के दफ्तरों में डेरा डाल दिया था। SIT ने अयोध्या में लगातार छह दिनों तक मैराथन जांच की। इस दौरान दान की गिनती करने वाले स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों और बैंक अधिकारियों समेत पांच दर्जन (60 से अधिक) से ज्यादा लोगों से कड़ी पूछताछ की गई। शासन ने SIT को 7 दिनों के भीतर प्रारंभिक और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम दिया था, जिसके तहत आज समय सीमा के अंदर पहली रिपोर्ट सौंप दी गई है।

रिपोर्ट सौंपने के बाद बोले SIT प्रमुख- ‘निष्कर्ष दे दिए हैं, लेकिन मामला बेहद गोपनीय है’

अपर मुख्य सचिव (गृह) को रिपोर्ट सौंपने के बाद SIT के प्रमुख और लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने मीडिया से बात की। उन्होंने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा, “हमने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील और गोपनीय है, इसलिए हम अभी इसके बारे में विस्तार से सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बता सकते। हालांकि, हमने छह दिनों की जांच में जो भी निष्कर्ष और तथ्य पाए हैं, उन्हें शासन को उपलब्ध करा दिया है।”

क्लीन चिट किसी को नहीं; 8 करोड़ की गड़बड़ी में कई अधिकारियों और करीबियों पर गिरेगी गाज!

भले ही इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस सीक्रेट रिपोर्ट में कई बड़े और कड़े ऐक्शन की सिफारिश की गई है:

  • FIR की सिफारिश: सूत्रों का दावा है कि SIT ने शुरुआती जांच में दोषी पाए गए कुछ प्रमुख कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत नामजद मुकदमा (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मजबूत सिफारिश की है।

  • नो क्लीन चिट: इस पूरे मामले में जांच एजेंसी ने अभी तक किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या अधिकारी को क्लीन चिट नहीं दी है। सभी पर शिकंजा कसा हुआ है।

  • नेक्सस की पड़ताल: चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों का चयन किस आधार पर हुआ और ट्रस्ट के किन पदाधिकारियों के साथ उनके क्या संबंध या साठगांठ थी, इसकी भी गहराई से पड़ताल की गई है।

  • आंतरिक अधिकारी रडार पर: मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और रोजाना के संचालन के लिए जिम्मेदार कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका भी इस समय सीधे जांच के दायरे में आ गई है।

  • जवाबदेही तय: प्रशासनिक स्तर पर निगरानी में कहां चूक हुई और किसकी लापरवाही से इतनी बड़ी चोरी मुमकिन हो पाई, रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है।

8 करोड़ से ज्यादा की चंदा चोरी के सबूत, अब तक ₹2.98 करोड़ कैश बरामद

इस पूरे घोटाले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच में अब तक कुल आठ करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी और गबन के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं। हालांकि, मुस्तैदी दिखाते हुए जांच एजेंसी ने अब तक इसमें से 2.98 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बरामद भी कर ली है। अब गेंद पूरी तरह से शासन के पाले में है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरी झंडी मिलते ही इस मामले में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ ऐसी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी जो आने वाले समय के लिए एक नजीर बनेगी।

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