Wednesday , 17 June 2026

महाराष्ट्र में फिर महा-भूकंप: ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत उद्धव गुट में बड़ी टूट! शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं 6 सांसद, दिल्ली पहुंचे CM एकनाथ शिंदे

नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के सियासी गलियारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल मची है और एक ऐसा बड़ा उलटफेर दस्तक देने के लिए तैयार है, जो उद्धव ठाकरे को अब तक का सबसे गहरा जख्म दे सकता है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत महाराष्ट्र की राजनीति में आज बहुत बड़ा ‘खेला’ होने की संभावना है, जिसकी पटकथा बीते कई दिनों से पर्दे के पीछे लिखी जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसद आज नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। इस महा-बगावत को अमलीजामा पहनाने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंच चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) में टूट की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब महाराष्ट्र में उद्धव गुट में एक और बड़ी सेंधमारी की खबर ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। शिवसेना (यूबीटी) में इस बड़ी बगावत की खबरों पर आज मुहर लग सकती है। उद्धव ठाकरे गुट के करीब 6 से 7 सांसद सुबह-सुबह ही नई दिल्ली पहुंच गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी बागी सांसद नई दिल्ली में शिवसेना नेता और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे के आधिकारिक आवास पर एक गुप्त और बेहद महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं।

श्रीकांत शिंदे के दिल्ली आवास पर गुप्त बैठक, चार्टर्ड प्लेन से पहुंचे सांसद

इस हाई-प्रोफाइल बैठक में खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे मौजूद रहने वाले हैं। एकनाथ शिंदे विशेष विमान से मुंबई से दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि परभणी के सांसद संजय उर्फ बंधु जाधव और यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख भी चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली लैंड कर चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में अंतिम रणनीति तैयार होने के बाद ये सभी सांसद सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे। बागी सांसद सबसे पहले लोकसभा में अपने एक अलग गुट बनाने की औपचारिक और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेंगे और इसके तुरंत बाद इस नए गुट का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली आधिकारिक शिवसेना में विलय करा दिया जाएगा।

‘प्लान-बी’ तैयार: कानूनी पेंच से बचने के लिए दिल्ली पहुंची शिंदे की लीगल टीम

इस बड़े सियासी ड्रामे के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की स्पेशल लीगल टीम भी दिल्ली पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, यदि शिवसेना (UBT) के सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होते हैं, तो दल-बदल कानून या किसी अन्य तकनीकी खराबी से जुड़े सभी संवैधानिक और कानूनी पहलुओं को बारीकी से परखने के लिए इस टीम को तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि उद्धव गुट की तरफ से होने वाली किसी भी संभावित कानूनी कार्रवाई या अदालती विवाद से बचने के लिए एकनाथ शिंदे ने पहले से ही अपनी कानूनी टीम को ‘अलर्ट मोड’ पर रहने के निर्देश दिए हैं। शिंदे गुट इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह नियमों के तहत हों।

‘मातोश्री’ में फ्लॉप हुई उद्धव की आपात बैठक, उड़ गई थी नींद

इस बगावत की भनक लगते ही उद्धव ठाकरे ने अपने निवास स्थान ‘मातोश्री’ पर आनन-फानन में पार्टी सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी, लेकिन यह बैठक पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। उद्धव गुट के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से सिर्फ 4 सांसद ही इस बैठक में शामिल होने पहुंचे। 5 सांसदों के नदारद रहने के बाद ही बगावत की अटकलों को पक्की मुहर मिल गई थी। सूत्रों का कहना है कि कम से कम छह सांसद लगातार शिंदे गुट के शीर्ष नेताओं के संपर्क में बने हुए हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि ये बागी सांसद 19 जून को आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट की सदस्यता ले सकते हैं, क्योंकि इसी दिन शिवसेना का स्थापना दिवस भी है।

इन 6 सांसदों के पाला बदलने की है पूरी चर्चा:

  • संजय दिना पाटिल

  • संजय देशमुख

  • नागेश पाटिल आष्टिकर

  • ओमराजे निंबाळकर

  • भाऊसाहेब वाकचौरे

  • संजय जाधव

2022 का इतिहास दोहराने की तैयारी, उद्धव को फिर लगेगा तगड़ा झटका

सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम ठीक ऐसे समय पर हो रहा है, जब कुछ ही दिनों बाद एकनाथ शिंदे की उस ऐतिहासिक बगावत के चार साल पूरे होने वाले हैं जिसने मूल शिवसेना के दो टुकड़े कर दिए थे। याद दिला दें कि 19 जून, 1966 को बालासाहेब ठाकरे द्वारा बनाई गई शिवसेना को साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने दो हिस्सों में तोड़ दिया था। तब शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के बहुसंख्यक विधायक और सांसद अलग हो गए थे। इसके बाद शिंदे गुट ने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई और चुनाव आयोग से असली ‘शिवसेना’ का नाम और ‘तीर-कमान’ का चुनाव चिन्ह भी हासिल कर लिया था। अब ठीक वैसा ही इतिहास लोकसभा सांसदों के स्तर पर दोहराने की तैयारी है।

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