चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में इस बार ‘बदलाव की बयार’ है या ‘विरासत का विस्तार’, इसका फैसला आज होने वाला है। राज्य की 234 विधानसभा सीटों पर मतगणना शुरू हो चुकी है। इस बार का चुनाव इसलिए खास है क्योंकि दशकों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के द्विध्रुवीय मुकाबले में दक्षिण भारतीय सुपरस्टार विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने धमाकेदार एंट्री मारी है। एग्जिट पोल्स की मानें तो विजय ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं। आइए नजर डालते हैं उन 10 हाई-प्रोफाइल सीटों पर, जो तमिलनाडु की सत्ता की दिशा तय करेंगी।
कोलाथुर: मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की साख दांव पर
कोलाथुर विधानसभा सीट मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का अभेद्य किला मानी जाती है। स्टालिन यहां से लगातार जीतते आए हैं, लेकिन इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। एआईएडीएमके ने पी. संथाना कृष्णन और टीवीके ने वी.एस. बाबू को मैदान में उतारकर मुख्यमंत्री को उनके ही घर में घेरने की कोशिश की है। क्या स्टालिन अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रख पाएंगे?
तिरुचिरापल्ली ईस्ट: सुपरस्टार विजय की एंट्री से मची खलबली
इस सीट ने पूरे चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। टीवीके के आने से यहां का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अभिनेता विजय की लोकप्रियता ने डीएमके के मंत्री के.एन. नेहरू की विरासत के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। एआईएडीएमके और डीएमके दोनों ने यहां अपने हेवीवेट उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे यह मुकाबला ‘स्टार पावर’ बनाम ‘पॉलिटिकल पावर’ बन गया है।
एडप्पाडी और चेपॉक: दिग्गजों का इम्तिहान
पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी अपने गढ़ ‘एडप्पाडी’ से मैदान में हैं, जहां उन्हें डीएमके के सी. काशी से कड़ी टक्कर मिल रही है। वहीं, चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी सीट से उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन अपनी पारिवारिक विरासत बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। उनके दादा एम. करुणानिधि ने यहां से तीन बार प्रतिनिधित्व किया था, ऐसे में उदयनिधि के लिए यह सीट जीतना प्रतिष्ठा का प्रश्न है।
कोयंबटूर दक्षिण और मदुरै सेंट्रल: बहुकोणीय मुकाबले के आसार
कोयंबटूर दक्षिण में इस बार भी 2021 जैसा रोमांच है। यहां डीएमके के सेंथिल बालाजी और एआईएडीएमके के अम्मान अर्जुनन के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन टीवीके और एनटीके ने इसे बहुकोणीय बना दिया है। मदुरै सेंट्रल में मंत्री पी. थियागराजन (PTR) का मुकाबला मशहूर फिल्म निर्देशक और खुशबू सुंदर के पति सी. सुंदर से है, जो एनडीए के उम्मीदवार हैं।
बोडिनायाकनूर और कन्याकुमारी: साख की असली लड़ाई
पूर्व डिप्टी सीएम ओ. पनीरसेल्वम बोडिनायाकनूर से अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कन्याकुमारी में राहुल गांधी से लेकर विजय तक ने प्रचार किया है, जिससे इस सीट का महत्व बढ़ गया है। यहां डीएमके, एआईएडीएमके और टीवीके के बीच कांटे की टक्कर है।
धर्मपुरी: राजनीतिक भविष्य का फैसला
धर्मपुरी सीट अंबुमणि रामदास के परिवार के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है। यहां उनकी पत्नी सौम्या रामदास मैदान में हैं। यह सीट तय करेगी कि पीएमके (PMK) का भविष्य तमिलनाडु की राजनीति में क्या होने वाला है।
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