वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। ईरान द्वारा पूरे देश में नोटम (NOTAM) जारी कर ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित करने के बाद युद्ध की आशंकाएं हकीकत में बदलती दिख रही हैं। जहाँ ईरान इसे रॉकेट परीक्षण की तैयारी बता रहा है, वहीं अमेरिका ने अपने सबसे घातक लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की घेराबंदी कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घेराबंदी केवल चेतावनी नहीं, बल्कि एक बड़े हमले की पूर्व-तैयारी (Pre-emptive Strike) हो सकती है।
अमेरिका की ‘आसमान से समुद्र तक’ घेराबंदी
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने अपनी सैन्य शक्ति का ऐसा प्रदर्शन किया है जो दशकों में नहीं देखा गया।
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अत्याधुनिक फाइटर जेट्स: अमेरिका ने अपने सबसे एडवांस F-35 लाइटनिंग II और F-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर जेट्स को ईरान की सीमा के पास रणनीतिक ठिकानों पर तैनात कर दिया है। ये जेट रडार की नजर में आए बिना हमला करने में सक्षम हैं।
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विशाल युद्धपोत: दो परमाणु ऊर्जा संचालित विमानवाहक पोत—यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड—अब मिडिल ईस्ट के पानी में मौजूद हैं। इनमें से एक ईरान के तट के बेहद करीब है, जो किसी भी समय मिसाइल हमले शुरू कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का ‘प्लान-ईरान’: कूटनीति या युद्ध?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर है। हालाँकि ट्रंप ने हमेशा “अमेरिका फर्स्ट” और युद्धों को खत्म करने की बात की है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अयातुल्ला खामेनेई की सरकार के प्रति उनका कड़ा रुख जगजाहिर है।
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जिनेवा वार्ता की विफलता: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार, जिनेवा में हुई बातचीत के दौरान ईरान ने ट्रंप की शर्तों (विशेषकर परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक) को मानने से साफ इनकार कर दिया।
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संभावित हमला: खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि कूटनीति पूरी तरह विफल रहती है, तो अमेरिका इस वीकेंड तक ईरान के विशिष्ट सैन्य और परमाणु ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है।
खामेनेई की ‘महायुद्ध’ की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान झुकने वाला नहीं है। 1 फरवरी 2026 को दिए अपने संबोधन में उन्होंने चेतावनी दी थी:
“अगर अमेरिका ने हमला किया, तो यह केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध (Full-scale Regional War) का रूप ले लेगा। हम किसी भी आक्रामकता का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार हैं।”
क्या हो सकते हैं इस युद्ध के परिणाम?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संघर्ष शुरू होता है, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं:
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वैश्विक तेल संकट: दुनिया की 20% तेल आपूर्ति ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से होती है। युद्ध की स्थिति में तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
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क्षेत्रीय अस्थिरता: इजराइल, लेबनान और इराक जैसे देश सीधे तौर पर इस युद्ध की आग में झुलस सकते हैं।
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मानवीय संकट: एक बड़े संघर्ष से शरणार्थियों की समस्या और जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। चाहते हैं?
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