Saturday , 25 July 2026

इलाज के नाम पर झांसा और देर रात बैठकें : धर्म परिवर्तन कराने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 7 आरोपी गिरफ्तार; तमिलनाडु से जुड़े तार…

लखनऊ। राजधानी लखनऊ से सटे मोहनलालगंज इलाके में पुलिस ने धर्म परिवर्तन कराने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सीधे-साधे ग्रामीणों को बीमारी के इलाज, संतान प्राप्ति, आर्थिक सहायता और शादी-विवाह जैसे प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाता था। इस पूरे मामले के तार तमिलनाडु के एक चर्च नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है, जिसकी पुलिस गहराई से छानबीन कर रही है।

ऐसे शुरू हुई जांच और एफआईआर

मामले का खुलासा तब हुआ जब मोहनलालगंज के भरसवा गांव निवासी अमित कुमार ने स्थानीय कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि गांव के ही चन्द्रभान, आरती, सीमा, डेनियल, सुबला, शीला और अजय रावत उन पर लगातार चर्च आने और धर्मांतरण करने का दबाव बना रहे थे। आरोपियों ने दावा किया था कि धर्म बदलने पर संतान प्राप्ति और कई अन्य आर्थिक लाभ मिलेंगे, वहीं विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी गईं। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया।

इलाज के नाम पर झांसा और देर रात बैठकें

पुलिस विवेचना के दौरान कई ग्रामीणों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से मोहनलालगंज और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय थे। वे देर रात चार पहिया गाड़ियों से गांवों में पहुंचते थे और गुप्त बैठकें आयोजित करते थे। एक पीड़ित गवाह ने पुलिस को बताया कि उसे घुटनों के दर्द के इलाज का झांसा देकर चर्च ले जाया गया था, जहां बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का मानसिक दबाव बनाया जाने लगा।

तमिलनाडु नेटवर्क और फंड का खेल

गहन पूछताछ में मुख्य आरोपी डेनियल ने कई राज उगले हैं। उसने बताया कि उसका मूल नाम बाला सुब्रह्मण्यम था और शादी के बाद उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। साल 1998 में वह तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित एफजीपीसी (FGPC) चर्च के निर्देशों पर लखनऊ आया था। आरोपी ने कबूल किया कि उन्हें लोगों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने का बाकायदा लक्ष्य (टारगेट) दिया जाता था और इसके लिए उन्हें भारी आर्थिक मदद (फंडिंग) भी मिलती थी। पुलिस अब बैंक अकाउंट्स और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

गाड़‍ियां, धार्मिक पुस्तकें और अहम दस्तावेज बरामद

पुलिस ने सभी सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक बोलेरो गाड़ी, धार्मिक पुस्तकें, धर्मांतरण से जुड़ी बुकलेट्स, विवाह से संबंधित संदिग्ध दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट की छायाप्रतियां जब्त की हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) रल्लापल्ली वसंथ कुमार और एसीपी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले के वित्तीय और अंतर्राज्यीय कनेक्शन की वैज्ञानिक जांच की जा रही है। कानूनन प्रलोभन या दबाव बनाकर धर्म बदलवाना बड़ा अपराध है, और इस नेटवर्क में शामिल अन्य दोषियों को भी जल्द बेनकाब कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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