नई दिल्ली। सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने एक बार फिर कड़ा और बड़ा एक्शन लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने पाकिस्तान में छिपे बैठे 23 खूंखार अपराधियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आधिकारिक तौर पर ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया है। सरकार के इस बड़े फैसले के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की कमर टूटना तय माना जा रहा है।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, ब्लैकलिस्ट किए गए ये सभी 23 लोग जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और अन्य खतरनाक संगठनों से जुड़े हैं। इन पर जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने, युवाओं को भड़काने, ड्रोन के जरिए हथियार सप्लाई करने और भारत में बड़े हमलों की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं।
हाफिज सईद के 3 सबसे वफादार ‘कमांडर’ रडार पर
गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस सूची में शामिल 23 लोगों में से तीन आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी सहयोगी हैं। सरकार ने इनकी पहचान राणा इफ्तिखार (54 वर्ष), अब्दुल रऊफ (52 वर्ष) और हाफिज खालिद वलीद (51 वर्ष) के रूप में की है।
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राणा इफ्तिखार: यह अलग-अलग जिहादी संगठनों के बीच तालमेल बिठाने और कश्मीरी युवाओं को आतंक की राह पर धकेलने का काम करता है।
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अब्दुल रऊफ: यह हाफिज सईद की सीधी कमान में रहकर लश्कर और जमात-उद-दावा के लिए दुनिया भर से टेरर फंडिंग (फंड इकट्ठा करना) जुटाने और हमलों की प्लानिंग करने का मुख्य काम देखता है।
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हाफिज खालिद वलीद: यह हाफिज सईद के सुरक्षा घेरे में रहता है और भारत में हुई कई बड़ी आतंकी घटनाओं का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जाता है।
नगरोटा और सुंजवान मिलिट्री कैंप हमलों के गुनहगार भी शामिल
इस नई सूची में केवल साजिशकर्ता ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना पर हुए बड़े हमलों के आरोपी भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सूची में शामिल तीन लोग साल 2016 में जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में सेना के कैंप पर हुए आत्मघाती हमले में शामिल थे। वहीं, दो अन्य नामचीन आतंकी साल 2018 में सुंजवान मिलिट्री स्टेशन पर हुए कायराना हमले के मुख्य आरोपी हैं।
एनआईए (NIA) को मिली असीमित ताकत, अब जब्त होगी संपत्ति
इन आतंकियों के नाम यूएएपीए (UAPA) की आधिकारिक सूची में शामिल होने के बाद भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को असीमित शक्तियां मिल गई हैं। अब एनआईए इन आतंकियों से जुड़े ग्लोबल फंड को फ्रीज (रोकना) कर सकती है, इनके हथियारों की खरीद-बिक्री पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगवा सकती है और भारत में मौजूद इनकी किसी भी बेनामी संपत्ति को तुरंत जब्त कर सकती है।
आपको बता दें कि साल 2019 में मोदी सरकार ने आतंकवाद-रोधी कानून में एक ऐतिहासिक संशोधन किया था, जिसके तहत संगठनों के साथ-साथ किसी अकेले व्यक्ति (इंडिविजुअल) को भी आतंकी घोषित करने का प्रावधान जोड़ा गया था।
भारत की हिटलिस्ट में हुए अब 80 आतंकी, देखें मुख्य नाम
शनिवार को पाकिस्तान में पनाह लिए हुए इन 23 नए नामों के जुड़ने के साथ ही भारत की इस मोस्ट वांटेड आतंकी सूची में कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
इस सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य चेहरे: मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मुहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जिहादी, गुलाम फरीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की और वसीम नूर जट हैं।
वहीं, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य गुटों के मुख्य आतंकी: फिरदौस अहमद भट, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कय्यूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अशफाक अहमद, मौलाना सैफुल्ला खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फारूक, कारी याकूब शेख और मोहम्मद शाहिद फैसल (जो अल-कायदा और ISIS के लिए भी काम करता है) शामिल हैं।
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