Friday , 12 June 2026

Indian Navy: समंदर में चीन-पाकिस्तान की खैर नहीं! भारतीय नौसेना को मिलेगा ₹449 करोड़ का ‘सैटेलाइट जैमर’, पलक झपकते ही अंधा हो जाएगा दुश्मन

नई दिल्ली: आधुनिक दौर में समंदर की जंग अब सिर्फ मिसाइलों, पनडुब्बियों और युद्धपोतों के दम पर नहीं जीती जाती, बल्कि अब युद्ध के मैदान पूरी तरह हाईटेक और डिजिटल हो चुके हैं। आज के समय में युद्ध का पासा पलटने में तकनीक सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। इसी रणनीतिक जरूरत को भांपते हुए भारत सरकार ने भारतीय नौसेना (Indian Navy) को एक ऐसी अत्याधुनिक और घातक प्रणाली से लैस करने का फैसला किया है, जो युद्ध की स्थिति में दुश्मन के सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम को पूरी तरह ठप और अंधा कर सकती है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने ₹449 करोड़ का एक बड़ा और महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया है।

बेंगलुरु की कंपनी से डील, ‘आत्मनिर्भर भारत’ को लगेगी उड़ान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने यह मेगा डील बेंगलुरु की मशहूर टेक कंपनी ‘एकॉर्ड सॉफ्टवेयर एंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ साइन की है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले ‘ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जैमर’ (ECGNSS Jammer) खरीदे जाएंगे। इस डील की सबसे खास बात यह है कि इन जैमर्स के निर्माण में कम से कम 75 फीसदी कलपुर्जों और तकनीक का विकास भारत में ही होगा, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।

क्या है ECGNSS जैमर और यह कैसे काम करता है?

ईसीजीएनएसएस (ECGNSS) जैमर एक बेहद एडवांस और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण (Electronic Warfare Equipment) है। यह उपकरण अंतरिक्ष में तैर रहे सैटेलाइट्स से जमीन या समंदर में मिलने वाले नेविगेशन सिग्नल्स (जैसे GPS या अन्य नेविगेशन प्रणालियों) में शक्तिशाली बाधा पैदा कर देता है। आज के डिजिटल युग में दुनिया भर की सेनाएं समुद्र और आसमान में दिशा तय करने, दुश्मन के सटीक ठिकानों को पहचानने और अपनी मिसाइलों व ड्रोनों को सटीक निशाने तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह से सैटेलाइट आधारित प्रणालियों पर ही निर्भर हैं।

दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलें रास्ता भटककर हो जाएंगी फुस्स

सैन्य विशेषज्ञों और रिपोर्ट के मुताबिक, अगर किसी युद्ध या सैन्य ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना इस जैमर का इस्तेमाल करती है, तो दुश्मन का नेविगेशन सिस्टम पूरी तरह काम करना बंद कर देगा। सिग्नल्स जाम होते ही दुश्मन के घातक सुसाइड ड्रोन, क्रूज मिसाइलें, लड़ाकू विमान और युद्धपोत अपनी सटीकता खो देंगे और रास्ता भटक जाएंगे। ऐसी स्थिति में दुश्मन को बिना कोई मिसाइल दागे भी घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है, जिससे भारतीय नौसेना को समुद्र में अभूतपूर्व रणनीतिक और तकनीकी बढ़त हासिल होगी।

हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी होगी मजबूत

मौजूदा समय में हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में चीनी नौसेना की बढ़ती जासूसी गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना खुद को लगातार अपग्रेड कर रही है। यह नए सैटेलाइट जैमर्स भारतीय नौसेना को बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन चलाने में मदद करेंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से न केवल देश की समुद्री सुरक्षा अभेद्य बनेगी, बल्कि 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल से भारत के घरेलू रक्षा उद्योगों को भी एक नया बूस्ट मिलेगा।

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