Saturday , 11 July 2026

एमपी उपचुनाव में महासंग्राम: दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर भारी बवाल, NH-44 पर पथराव में SP सहित कई पुलिसकर्मी लहूलुहान

दतिया। मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा अपने उम्मीदवार की घोषणा करते ही पूरे इलाके में भयंकर बवाल कट गया है। भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से आक्रोशित उनके हजारों समर्थकों ने कल रात नेशनल हाईवे-44 (NH-44) को पूरी तरह से बंधक बना लिया। देखते ही देखते इस प्रदर्शन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया, जिसके बाद तड़के सुबह पुलिस पर हुए भीषण पथराव में दतिया के एसपी मयूर खंडेलवाल और एडिशनल एसपी समेत 6 से अधिक पुलिस जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पूरे इलाके में भारी तनाव है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

NH-44 पर 15 किलोमीटर लंबा भीषण जाम, तड़के सुबह रणक्षेत्र बना दतिया

न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) मयूर खंडेलवाल ने बताया कि कल शाम 6 बजे से ही करीब 3,000 से ज्यादा उपद्रवी दतिया शहर का माहौल बिगाड़ने पर आमादा थे। इन लोगों ने जबरन बाजार बंद कराए और नेशनल हाईवे पर ‘चक्का जाम’ कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के चलते हाईवे पर देखते ही देखते करीब 15 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया, जिससे पड़ोसी जिलों की यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद एसपी और कलेक्टर ने मौके पर मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से बार-बार जाम हटाने की प्रशासनिक अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी टस से मस नहीं हुए। इसके बाद आज सुबह करीब 4 बजे उपद्रवियों ने अचानक पुलिस टीम को निशाना बनाते हुए पत्थरों से हमला बोल दिया।

आंसू गैस के गोले छोड़े, एसपी बोले- ‘उपद्रवियों को खदेड़ा, कई हिरासत में’

घायल एसपी मयूर खंडेलवाल ने अस्पताल से बताया, “माहौल को बिगड़ता देख पुलिस ने शुरुआत में आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद उपद्रवियों की तरफ से पथराव और ज्यादा तेज कर दिया गया। इस जानलेवा हमले में मुझे, एडिशनल एसपी और हमारे 6 से अधिक जवानों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए दोबारा आंसू गैस का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग कर उपद्रवियों को मौके से खदेड़ दिया है। कुछ उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है और बाकी बचे लोगों को तुरंत सरेंडर करने की सख्त चेतावनी दी गई है।”

भाजपा जिला मंत्री का बड़ा आरोप: ‘दफ्तर में कार्यकर्ताओं को किया कैद, जारी रहेगा चक्का जाम’

इस पूरे बवाल के बीच राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने मीडिया से बातचीत में पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “हम लोग बेहद शांतिपूर्ण तरीके से अपने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से यह मांग कर रहे थे कि दतिया का जो टिकट घोषित हुआ है, उसे वापस लिया जाए और हमारे नेता नरोत्तम मिश्रा जी को ही उम्मीदवार बनाया जाए। हम संवैधानिक रूप से अपनी मांग रख रहे थे। हम लोगों ने तो पूरी रात रामधुन गाकर भाजपा नेतृत्व से गुहार लगाई, लेकिन पुलिस प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और दतिया कलेक्टर की बर्बरता देखिए कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को भाजपा दफ्तर में ही कैद कर दिया गया। जब तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी को टिकट नहीं मिलेगा, हम लोग यह चक्का जाम और आंदोलन जारी रखेंगे।”

क्यों सुलग उठा दतिया? आखिर क्यों नाराज हैं नरोत्तम के समर्थक

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ शुक्रवार को भाजपा द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की सूची है। बीजेपी आलाकमान ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा का पत्ता साफ करते हुए आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों को शत-प्रतिशत भरोसा था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा, यहां तक कि नरोत्तम मिश्रा ने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था।

जैसे ही दिल्ली से आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान हुआ, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के सब्र का बांध टूट गया और वे सड़कों पर उतर आए। गुस्से का आलम यह था कि कुछ समर्थक शर्ट उतारकर सड़क पर लेट गए और ‘नरोत्तम दादा’ को टिकट न मिलने पर बीजेपी से सामूहिक इस्तीफे तक की धमकी देने लगे। हालांकि, टिकट मिलने के बाद आशुतोष तिवारी ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए कहा कि नरोत्तम मिश्रा उनके अभिभावक हैं और उन्होंने उनके लिए चुनाव प्रचार करने की बात कही है।

जानिए आखिर क्यों हो रहा है दतिया सीट पर उपचुनाव?

आपको बता दें कि साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था, जहां कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। लेकिन इसी साल (2026) अप्रैल महीने में दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में 3 साल की सजा सुना दी। नियमानुसार, 2 साल से अधिक की सजा मिलने के कारण राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द हो गई, जिसके चलते दतिया विधानसभा सीट खाली हो गई। अब इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं, जहां आगामी 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 3 अगस्त को चुनावी नतीजे घोषित होंगे। फिलहाल टिकट कटने के बाद उपजे इस आक्रोश ने भाजपा की राहें मुश्किल कर दी हैं।

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