
वैकल्पिक व्यवस्था तलाशे जनता
कच्चे तेल की मार…तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के बढ़ाए
दाम, इंडस्ट्रियल यूल की कीमत 25 प्रतिशत बढ़ी
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध का सीधा असर अब भारत की रसोई और उद्योगों पर दिखने लगा है। युद्ध के 20 दिन बीत जाने के बाद होर्मूज स्ट्रेट से होने वाली सप्लाई बाधित होने के कारण देश में एलपीजी (LPG) की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि पेट्रोलियम मंत्रालय को आम जनता से वैकल्पिक ईंधनों पर विचार करने की अपील करनी पड़ी है। वहीं, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय मार के चलते प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2.35 रुपये तक बढ़ गए हैं और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
LPG की स्थिति गंभीर, पैनिक बुकिंग से बचने की सलाह
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि एलपीजी की आपूर्ति चैन पर दबाव बना हुआ है। हालांकि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं तक शत-प्रतिशत गैस पहुँचाने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किल्लत बरकरार है। मंत्रालय के अनुसार, 19 मार्च को ही रिकॉर्ड 55 लाख सिलेंडरों की बुकिंग हुई। सरकार ने पैनिक बुकिंग और अफवाहों से बचने का अनुरोध करते हुए कहा है कि लोग जरूरत के हिसाब से ही गैस बुक करें। जमाखोरी रोकने के लिए देश भर में 4500 से अधिक छापेमारी की गई है, जिनमें से 1100 अकेले उत्तर प्रदेश में हुई हैं।
महँगा हुआ ईंधन: प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल के दाम बढ़े
तेल कंपनियों ने आम आदमी पर बोझ न डालते हुए केवल ‘प्रीमियम’ श्रेणी के पेट्रोल के दामों में 2.35 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। उदाहरण के तौर पर, पुणे में स्पीड और पावर जैसे ईंधन अब 113.77 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहे हैं। सबसे बड़ा झटका औद्योगिक क्षेत्र को लगा है, जहाँ थोक डीजल (Industrial Fuel) की कीमतों में 22 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके दाम 87.67 रुपये से सीधे उछलकर 109.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गए हैं, जिससे फैक्ट्रियों की उत्पादन लागत बढ़ना तय है।
सूरत से मजदूरों का पलायन: ‘भूखे मर रहे, इसलिए गांव जा रहे’
गैस संकट का सबसे भयावह चेहरा गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में देखने को मिल रहा है। यहाँ एलपीजी की भारी किल्लत के चलते कई छोटी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं, जिससे प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय मजदूरों का कहना है कि गैस के छोटे सिलेंडर तक नहीं मिल रहे और कालाबाजारी में कीमतें आसमान छू रही हैं। मजबूरन, श्रमिक अपने परिवारों के साथ गाँवों की ओर पलायन कर रहे हैं। कई घरों में अब उपलों (गोबर के कंडे) पर खाना बनाने की नौबत आ गई है।
सरकार का मास्टर प्लान: PNG विस्तार पर जोर
संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को एक खास प्रस्ताव दिया है। सरकार ने राज्यों से अपील की है कि वे ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ (PNG) के नेटवर्क विस्तार में तेजी लाएं। जो राज्य इसमें सहयोग करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन के रूप में कमर्शियल एलपीजी का 20 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा आवंटित किया जाएगा। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ईरान में फंसे 913 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित वापस लाया जा रहा है।
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