Wednesday , 15 July 2026

PoK में फिर भड़का बारूद: पाकिस्तानी फौज की फायरिंग में 9 नागरिकों की मौत, व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन, भारत ने घेरा

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात एक बार फिर बेकाबू हो गए हैं। रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा स्थानीय नागरिकों के खिलाफ चलाए गए एक हिंसक अभियान के बाद पूरे इलाके में जबरदस्त झड़पें शुरू हो गई हैं। शहर के न्यू बस टर्मिनल के पास भड़की इस हिंसा में पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग में 9 आम नागरिकों की मौत हो गई है। इस ताजा खूनखराबे के बाद पूरे क्षेत्र में इस्लामाबाद की दमनकारी नीतियों के खिलाफ गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

अपनों की मौत से फूटा गुस्सा, मटियाल मीरा बस टर्मिनल बना अखाड़ा

रावलाकोट में हुई इस बर्बर कार्रवाई में जान गंवाने वाले नागरिकों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात जैसे स्थानीय नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि वाजिद हयात को मटियाल मीरा बस टर्मिनल पर पाकिस्तानी जवानों ने निशाना बनाया। निर्दोष लोगों की मौत की खबर फैलते ही हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और सुरक्षाबलों के साथ आमने-सामने की जंग शुरू हो गई। इलाके में भारी तनाव है और पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ लगातार नारेबाजी हो रही है।

व्हाइट हाउस के बाहर गूंजी PoK की आवाज, अमेरिका से दखल की मांग

रावलाकोट में हुए इस कत्लेआम से ठीक एक दिन पहले अमेरिका में रह रहे PoK के प्रवासियों ने वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं और बच्चों समेत करीब 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने रोष जताते हुए कहा कि उनकी मातृभूमि में लोग भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तानी फौज स्थानीय लोगों को घरों से उठाकर मौत के घाट उतार रही है। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति और वैश्विक नेताओं से गुहार लगाई कि वे पाकिस्तानी सेना के इस खूनी दमन चक्र को रोकने के लिए तुरंत कड़ा एक्शन लें।

‘PoK से हटे पाक सेना, भारत करे हस्तक्षेप’— प्रदर्शनकारियों की बड़ी अपील

वॉशिंगटन में जुटे प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पाकिस्तानी सेना को तत्काल PoK के नागरिक रिहायशी इलाकों से बाहर निकाला जाए। इसके साथ ही उन्होंने वहां किए गए लंबे इंटरनेट शटडाउन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 40 लाख आबादी को पूरी दुनिया से काट दिया गया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक बेहद चौंकाने वाली और अनोखी अपील करते हुए भारत सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुंछ और डोडा सेक्टर के रास्ते नियंत्रण रेखा (LoC) को खोला जाए ताकि संकट में फंसे लोगों तक भारत की ओर से मानवीय सहायता और राहत पहुंचाई जा सके।

भारत का करारा हमला— दशकों के शोषण और अवैध कब्जे का नतीजा है यह गुस्सा

PoK में बिगड़ते हालातों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी मंगलवार को पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा कि PoK में चल रहा यह हिंसक विरोध प्रदर्शन कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे PoK की गंभीर स्थिति पर ध्यान दें और वहां हो रहे अत्याचारों के लिए पाकिस्तान की जवाबदेही तय करें।

क्यों सुलग रहा है PoK? जानिए इस नई अशांति की असली वजह

दरअसल, PoK में अशांति की यह नई चिंगारी तब भड़की जब पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए पाक-अधिकृत कश्मीर की असेंबली में 12 सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया गया। स्थानीय नागरिक इस फैसले का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने अतिरिक्त फौजें तैनात कर दी हैं, इंटरनेट पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और आंदोलन कर रहे नागरिक नेताओं की धरपकड़ तेज कर दी है, जिससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

 

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