
धौरहरा (लखीमपुर खीरी): उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर खीरी के धौरहरा क्षेत्र में खूंखार जंगली जानवरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। धौरहरा कोतवाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमेठी में सोमवार शाम को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक आदमखोर तेंदुए ने पांच वर्षीय मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला कर दिया। इस दुस्साहसिक हमले के बाद से पूरे इलाके और आस-पास के गांवों में भयंकर दहशत का माहौल बना हुआ है। तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। वहीं, घटना के बाद से वन विभाग की टीम ने इलाके में डेरा डाल दिया है।
गन्ने के खेत में घात लगाकर बैठा था तेंदुआ, पानी लगाने गए परिवार पर किया हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेठी गांव के रहने वाले राममूर्ति सोमवार की शाम को रोजमर्रा की तरह अपने परिवार के साथ खेत पर काम करने गए थे। उनके साथ उनकी पत्नी और दो मासूम बच्चे—शिवा राजपूत (10 वर्ष) और कृष्णा (5 वर्ष) भी मौजूद थे। पूरा परिवार खेत में फसल की सिंचाई (पानी लगाने) के काम में व्यस्त था, तभी गन्ने के घने और ऊंचे खेत में पहले से ही घात लगाकर छिपे बैठे तेंदुए ने अचानक पांच साल के मासूम कृष्णा पर हमला बोल दिया।
तेंदुए ने पलक झपकते ही बच्चे को दबोच लिया और उसे खींचने का प्रयास करने लगा। अचानक हुए इस खौफनाक हमले को देख माता-पिता के होश उड़ गए। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए लाठी-डंडे लेकर शोर मचाना शुरू कर दिया। परिजनों के भारी शोर-शराबे और साहस को देखकर तेंदुआ सहम गया और मासूम कृष्णा को लहूलुहान हालत में छोड़कर वापस गन्ने के घने खेतों की तरफ भाग निकला।
सीएचसी से जिला अस्पताल ओयल रेफर, डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज
तेंदुए के चंगुल से छुड़ाए गए मासूम कृष्णा की हालत बेहद नाजुक थी, उसके शरीर पर तेंदुए के गहरे दांत और नाखून के निशान थे। खून से लथपथ बच्चे को परिजन आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) धौरहरा लेकर भागे। वहां मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए और प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल ओयल (लखीमपुर खीरी) के लिए रेफर कर दिया।
मंगलवार को भी जिला अस्पताल के स्पेशल वार्ड में डॉक्टरों की देखरेख में बच्चे का इलाज जारी रहा। अस्पताल प्रशासन और परिजनों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, बच्चे की हालत में अब पहले से कुछ सुधार बताया जा रहा है, लेकिन घाव गहरे होने के कारण उसे अभी भी डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है।
वन विभाग ने संभाला मोर्चा, ग्रामीणों को अकेले खेतों में न जाने की सख्त हिदायत
मासूम पर तेंदुए के हमले की इस सनसनीखेज खबर के बाद वन विभाग प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन दरोगा राजेश दीक्षित के नेतृत्व में वन कर्मियों की एक विशेष टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। वन विभाग की टीम ने गन्ने के खेतों के आसपास तेंदुए के पदचिह्नों (पगमार्क) को तलाशने की कोशिश की और इलाके में अपनी गश्त (निगरानी) बढ़ा दी है।
विभागीय अधिकारियों ने अमेठी और उसके आस-पास के तमाम ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें बेहद सतर्क और सावधान रहने की अपील की है। वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए एक गाइडलाइन जारी करते हुए सख्त हिदायत दी है कि कोई भी व्यक्ति अकेले या रात के समय खेतों की तरफ न जाए। इसके साथ ही, छोटे बच्चों को गन्ने के खेतों के आसपास बिल्कुल भी अकेला न छोड़े और हमेशा समूह (ग्रुप) में ही लाठी-डंडों के साथ बाहर निकलें।
गन्ने के घने खेत बने तेंदुए की पनाहगाह, पिंजरा लगाकर पकड़ने की उठी मांग
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद से अमेठी सहित आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। किसान अपने ही खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि धौरहरा का यह पूरा इलाका तराई बेल्ट से जुड़ा हुआ है और यहां गन्ने की खेती बहुत बड़े पैमाने पर होती है। गन्ने के ऊंचे और घने खेत इन जंगली जानवरों के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं, जिसके कारण आए दिन हिंसक जानवरों की मौजूदगी की आशंका बनी रहती है।
गावं के लोगों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इलाके में तुरंत लोहे का पिंजरा लगाया जाए और आदमखोर हो रहे इस तेंदुए को जल्द से जल्द ट्रेंकुलाइज कर या पिंजरे में कैद कर पकड़ा जाए, ताकि क्षेत्र में किसी अन्य मासूम की जान को खतरे में पड़ने से रोका जा सके और कोई बड़ी अप्रिय घटना न हो।
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