Sunday , 3 May 2026

इस्तांबुल में ‘हमजा’ बनकर छिपा था दाऊद का राइट हैंड, एक ‘ऑनलाइन ऑर्डर’ ने सलाखों के पीछे पहुंचाया; चौंकाने वाली कहानी

नई दिल्ली/मुंबई: अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के बेहद करीबी और डी-कंपनी के ‘नारकोटिक्स किंग’ कहे जाने वाले सलीम डोला का खेल आखिरकार खत्म हो गया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन में डोला को तुर्की के इस्तांबुल से गिरफ्तार कर भारत लाने में सफलता हासिल की है। इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस पर हुई इस कार्रवाई ने अंडरवर्ल्ड के नेटवर्क को हिला कर रख दिया है। 59 वर्षीय सलीम डोला मुंबई के डोंगरी का रहने वाला है और सालों से भारतीय एजेंसियों की आंखों में धूल झोंक रहा था।

एक छोटी सी गलती और ढेर हो गए शातिर अपराधी के सैकड़ों जुगाड़

सलीम डोला को पकड़ने का यह मिशन ‘भूसे के ढेर में सुई ढूंढने’ जैसा चुनौतीपूर्ण था। डोला अपनी पहचान और लोकेशन बदलने में माहिर था, लेकिन एक मामूली सी लापरवाही उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। दरअसल, इस्तांबुल में छिपकर रह रहे डोला ने हाल ही में एक कूरियर ऑर्डर किया था। जल्दबाजी या ओवर कॉन्फिडेंस में उसने डिलीवरी का पता अपने उसी गुप्त ठिकाने का दे दिया जहां वह छिपा हुआ था। इसी डिजिटल लेन-देन के जरिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को उसका सुराग मिला, जिसके बाद इंटरपोल की मदद से उसे इस्तांबुल पुलिस ने दबोच लिया।

डेढ़ साल तक कमरे में रहा कैद, ‘हमजा’ बनकर काट रहा था दिन

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गिरफ्तारी के डर से सलीम डोला पिछले करीब डेढ़ साल से इस्तांबुल के एक कमरे से बाहर नहीं निकला था। वह पूरी तरह अंडरग्राउंड था और खुद को सुरक्षित मान रहा था। छापेमारी के दौरान उसके पास से तीन पासपोर्ट बरामद हुए हैं, जिनमें दो भारतीय और एक बुल्गारियाई पासपोर्ट शामिल है। वह तुर्की में अपनी असली पहचान छिपाकर ‘हमजा’ नाम से रह रहा था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि बुल्गारियाई पासपोर्ट असली है या उसे फर्जी तरीके से बनवाया गया था।

दाऊद इब्राहिम से सीधा कनेक्शन और ड्रग्स का काला कारोबार

मंगलवार (05 मई 2026) को तुर्की से दिल्ली लाए जाने के बाद डोला को मुंबई की एक विशेष अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 8 मई 2026 तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की हिरासत में भेज दिया है। एनसीबी ने अदालत को बताया कि सलीम डोला केवल एक भगोड़ा नहीं, बल्कि दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट का मुख्य स्तंभ है। जून 2023 में दक्षिण मुंबई से जब्त की गई मेफेड्रोन (Mephedrone) की भारी भरकम खेप का असली मास्टरमाइंड डोला ही था। वह विदेशों में बैठकर भारत में ड्रग्स की सप्लाई को ऑपरेट कर रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी जीत: अब खुलेंगे डी-कंपनी के कई राज

सलीम डोला का भारत लाया जाना भारतीय जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान डोला से दाऊद इब्राहिम के ठिकानों, ड्रग्स सिंडिकेट के टेरर फंडिंग कनेक्शन और मुंबई में सक्रिय उसके गुर्गों के बारे में अहम जानकारियां मिल सकती हैं। फिलहाल, एनसीबी और अन्य एजेंसियां डोला के कॉल रिकॉर्ड्स और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन को खंगालने में जुटी हैं।

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