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दिल्ली-NCR में झमाझम बरसेंगे बादल, यूपी से उत्तराखंड तक रेड अलर्ट: अगस्त में सावन लाएगा मानसून की भारी बारिश

नई दिल्ली: जुलाई के महीने में मॉनसून की बेरुखी झेल रहे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के राज्यों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगस्त में सावन के महीने के दौरान उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मानसून पूरी तरह मेहरबान रहेगा। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र (Deep Depression) और सक्रिय मॉनसून ट्रफ के कारण 1 अगस्त से ही झमाझम बारिश का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।

दिल्ली-NCR में 1 से 5 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में अगस्त के पहले हफ्ते में तेज मानसूनी बारिश देखने को मिलेगी। 1 से 5 अगस्त तक मध्यम से भारी बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। इससे पिछले कुछ दिनों से जारी भीषण उमस और गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में अलर्ट: पूर्वांचल से लेकर नोएडा-गाजियाबाद तक बरसेंगे बादल

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में अगस्त के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।

  • पूर्वांचल और तराई क्षेत्र: गोरखपुर, देवरिया, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जैसे जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश: नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तराखंड में फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड की चेतावनी, चारधाम यात्रा पर असर

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में 1 से 5 अगस्त के बीच अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslide) और नदियों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) को लेकर अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने चारधाम यात्रा के मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

पंजाब, हरियाणा और मध्य भारत का मौसम हाल

पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में अगस्त की शुरुआत से ही गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश देखने को मिलेगी। यह बारिश धान की फसल के लिए बेहद संजीवनी साबित होगी, हालांकि शहरी इलाकों में जलभराव (Waterlogging) की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

वहीं, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अंदरूनी हिस्सों में बना दबाव का क्षेत्र पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही उत्तर पाकिस्तान और जम्मू डिवीजन पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) के कारण पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की गतिविधियां बेहद तेज रहने वाली हैं।

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