Wednesday , 9 September 2026

BSP Politics: मायावती के एक्शन के बाद आकाश आनंद की चुप्पी के क्या हैं सियासी मायने? संगठन में दो नए चेहरों की एंट्री से हलचल तेज

बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद आकाश आनंद की अगली सियासी रणनीति को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। अचानक हुए इस बड़े बदलाव के बावजूद आकाश आनंद का रुख पूरी तरह संयमित नजर आ रहा है। वे लगातार बसपा सुप्रीमो मायावती के सोशल मीडिया बयानों को रीपोस्ट और फॉलो कर नेतृत्व के प्रति अपनी अटूट वफादारी साबित करने में जुटे हैं। केवल आकाश ही नहीं, बल्कि उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी बहनजी की नाराजगी दूर करने के लिए इसी राह पर चलते दिखाई दे रहे हैं।

संगठन में बड़ा फेरबदल, नए युवा चेहरों को कमान आकाश पर एक्शन के साथ ही बसपा ने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने दो नए युवा नेताओं, मोहित आनंद और नितिन सिंह को नेशनल कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी है। मध्य प्रदेश में संगठन का काम संभाल रहे मोहित आनंद को अब राष्ट्रीय स्तर पर परखा जाएगा। वहीं, नितिन सिंह को पिछले साल अशोक सिद्धार्थ के साथ निष्कासित किया गया था, लेकिन बाद में पार्टी में उनकी वापसी करा दी गई थी। अब उन्हें संगठन में यह अहम पद देकर पार्टी ने संतुलन साधने की कोशिश की है।

आकाश पर हाईकमान का रुख नरम, बाहर का रास्ता दिखाने पर नहीं बनी बात पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अशोक सिद्धार्थ की तुलना में आकाश आनंद को लेकर पार्टी हाईकमान का रुख अभी भी काफी लचीला बना हुआ है। यही कारण रहा कि तमाम चर्चाओं के बावजूद आकाश को पार्टी से पूरी तरह निष्कासित करने पर सहमति नहीं बनी। भले ही उनसे सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियां वापस ले ली गई हों, लेकिन उन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने की गतिविधियों से रोका नहीं गया है। बसपा में आकाश के राजनीतिक भविष्य का अंतिम फैसला अब पूरी तरह मायावती के हाथ में है।

वरिष्ठ नेताओं से तनातनी और डैमेज कंट्रोल का दांव राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आकाश आनंद ने संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद पुराने क्षत्रपों ने उनके खिलाफ लामबंदी शुरू कर दी, जिसका खामियाजा आकाश को भुगतना पड़ा। हालांकि, पारिवारिक और सांगठनिक संतुलन बनाए रखने के लिए मायावती ने आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर डैमेज कंट्रोल का दांव चला है।

चुनावी तैयारियों पर कलह का साया, रैलियां रद्द होने से कार्यकर्ता मायूस विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी के भीतर छिड़ी इस रार से नुकसान होने की आशंका गहरा गई है। चुनावी मैदान में उतरे कई प्रत्याशी अपनी विधानसभाओं में आकाश आनंद की रैलियों और जनसभाओं की लगातार मांग कर रहे थे। सितंबर महीने में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में उनके कई बड़े चुनावी कार्यक्रम प्रस्तावित थे, जो अब खटाई में पड़ गए हैं।

समर्थकों में गुस्सा, पुराने नेताओं पर नेतृत्व को भड़काने का आरोप इधर, फैसले के बाद आकाश के समर्थक सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय हैं और उनकी जल्द वापसी की मांग उठा रहे हैं। समर्थकों का सीधा आरोप है कि पार्टी के कुछ पुराने पदाधिकारियों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते नेतृत्व को गुमराह किया और साजिश के तहत आकाश आनंद को मुख्यधारा से अलग करवाया।

 

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