Friday , 29 May 2026

छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा: कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर पर डी-माइनिंग के दौरान IED ब्लास्ट, DRG के 4 जांबाज जवान शहीद

कांकेर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। कांकेर और नारायणपुर जिले की सरहद पर नक्सलियों द्वारा बिछाए गए बारूदी सुरंगों को हटाने (De-mining) के दौरान एक भयानक आईईडी विस्फोट हो गया। इस हादसे में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के तीन जवान मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि एक गंभीर रूप से घायल जवान ने रायपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए जवानों की शहादत को नमन किया है।

कोरोसकोड़ा के जंगलों में ऑपरेशन के दौरान हुआ धमाका

जानकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोरोसकोड़ा के घने जंगलों में हुई। कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि डीआरजी की एक विशेष टीम सीमावर्ती इलाकों में सर्चिंग और डी-माइनिंग अभियान पर निकली थी। जवान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए आईईडी का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय कर रहे थे, ताकि आम नागरिकों और सुरक्षाबलों को सुरक्षित रखा जा सके। इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक एक शक्तिशाली आईईडी में ब्लास्ट हो गया, जिसकी चपेट में टीम के सदस्य आ गए।

शहादत देने वाले वीरों की पहचान

इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में डीआरजी के चार जांबाज जवानों ने अपनी जान गंवाई है। शहीद होने वाले जवानों में शामिल हैं:

  • इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी

  • कांस्टेबल कृष्णा कोमरा

  • कांस्टेबल संजय गढपाले

  • कांस्टेबल परमानंद कोमरा (इलाज के दौरान रायपुर में मौत)

हादसे के तुरंत बाद घायल जवान परमानंद कोमरा को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर भेजा गया था, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने जताया दुख

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टिलिंगम ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि आत्मसमर्पित माओवादियों से मिले इनपुट के आधार पर सुरक्षाबल लगातार आईईडी बरामद कर उन्हें नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी सैकड़ों आईईडी निष्क्रिय किए जा चुके हैं, लेकिन आज का ऑपरेशन दुर्भाग्यपूर्ण रहा और एक आईईडी को डिफ्यूज करते समय अचानक हुए विस्फोट ने हमारे चार बहादुर साथियों को हमसे छीन लिया।

फोर्स के लिए बड़ी चुनौती है आईईडी का जाल

बस्तर के जंगलों में नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे बिछाए गए आईईडी बम सुरक्षाबलों के लिए हमेशा से सबसे बड़ी चुनौती रहे हैं। ये प्रेशर बम न केवल जवानों के लिए काल बनते हैं, बल्कि इनकी चपेट में आने से कई बार स्थानीय ग्रामीण और बेगुनाह मवेशी भी अपनी जान गंवा देते हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इन इलाकों को ‘बम मुक्त’ करने के अभियान में जुटी हैं, जिसमें आज डीआरजी के इन जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।

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