Friday , 3 July 2026

लखनऊ का ‘क्राइम सेंटर’: सबमिट बिल्डिंग में अंग्रेजी बोलकर 200 करोड़ ठगने वाली हसीनाएं गिरफ्तार, शाम ढलते ही शुरू होता था ‘हसीनों का मायाजाल’

लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ के सबसे पॉश और चर्चित इलाके में स्थित ‘सबमिट बिल्डिंग’ (Summit Building) से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस और खुफिया एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। यहां कॉर्पोरेट स्टाइल में एक हाईटेक कॉल सेंटर चलाया जा रहा था, जिसके जरिए अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की अंतरराष्ट्रीय ठगी को अंजाम दिया जा चुका है। लखनऊ पुलिस ने इस काले धंधे का पर्दाफाश करते हुए 119 युवक-युवतियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस बड़ी कार्रवाई को देश में साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन्स में से एक माना जा रहा है।

शाम ढलते ही सक्रिय होते थे 119 ठग, अमेरिका के लोग बनते थे शिकार

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार ने बताया कि यह गिरोह भारत में बैठकर सात समंदर पार अमेरिका (USA) के नागरिकों को अपना निशाना बनाता था। सबमिट बिल्डिंग के 11वें माले पर दो बड़े ऑफिस स्पेस किराए पर लेकर यह पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था।

हैरान करने वाली बात यह है कि यहां काम करने वाले 119 कर्मचारी शाम को 7 बजे दफ्तर आते थे और सुबह के 3 बजे तक अमेरिकी टाइम जोन के हिसाब से एक्टिव रहते थे। ये लोग विदेशी नागरिकों को इन्वेस्टमेंट के नाम पर और बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर अपनी मीठी-मीठी बातों के जाल में फंसाते थे।

नॉर्थ-ईस्ट की 40 लड़कियां गिरफ्तार, 25 हजार सैलरी और 10% कमीशन का लालच

इस पूरे रैकेट की सबसे मजबूत कड़ी थीं फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली लड़कियां। पुलिस ने छापेमारी के दौरान जिन 119 लोगों को दबोचा है, उनमें 40 युवतियां शामिल हैं। ये सभी लड़कियां देश के नॉर्थ-ईस्ट (पूर्वोत्तर) राज्यों की रहने वाली हैं, जो अच्छी अंग्रेजी बोलने में माहिर हैं।

लखनऊ के पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सेंगर के मुताबिक, इन लड़कियों को महज 25,000 रुपये प्रति माह की फिक्स सैलरी पर रखा गया था। लेकिन इन्हें हर महीने ठगी का एक फिक्स टारगेट दिया जाता था। टारगेट पूरा करने पर ठगी गई रकम का 10 फीसदी हिस्सा इन्हें इंसेंटिव (कमीशन) के तौर पर मिलता था। पूछताछ में गिरफ्तार लड़कियों ने कबूल किया है कि वे जानती थीं कि वे अपराध कर रही हैं, लेकिन ज्यादा पैसा कमाने के लालच में वे लंबे समय से इस गिरोह के लिए काम कर रही थीं।

Amazon, Apple और FBI के नाम पर डिजिटल डकैती, ऐसे फंसाते थे जाल में

पुलिस को मौके से भारी मात्रा में विदेशी नागरिकों का डेटा, कॉलिंग स्क्रिप्ट, VoIP कॉलिंग सिस्टम, Eyebeam Dialer और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। यह गिरोह खुद को Amazon, Microsoft, Apple, PayPal, Netflix और Facebook जैसी नामी कंपनियों के कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताकर विदेशियों को कॉल करता था।

जब कोई इनके झांसे में आ जाता, तो गिरोह के अन्य सदस्य खुद को अमेरिकी जांच एजेंसी FBI या FTC के अधिकारी बताकर उन्हें गिरफ्तारी और अदालती कार्रवाई का डर दिखाते थे। केस रफा-दफा करने के नाम पर ये अमेरिकी नागरिकों से गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर के रूप में लाखों डॉलर ऐंठ लेते थे ताकि पैसों के ट्रांसफर को ट्रेस न किया जा सके।

हर महीने 3 करोड़ का था ऑफिस खर्च, देश के कई राज्यों से जुड़े हैं तार

पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में जो खुलासा किया है, वह चौंकाने वाला है। सबमिट बिल्डिंग में इस फर्जी कॉल सेंटर को संचालित करने का मासिक खर्च ही करीब 3 करोड़ रुपये आता था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह गिरोह हर महीने कितने बड़े पैमाने पर करोड़ों की डिजिटल डकैती डाल रहा था।

इस गिरोह के तार देशव्यापी नेटवर्क से जुड़े हैं। लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़े शातिर अपराधियों में गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली के मास्टरमाइंड भी शामिल हैं। पुलिस अब इनके वित्तीय नेटवर्क, सर्वर, ई-मेल अकाउंट और तकनीकी सहयोगियों की तलाश में जुट गई है। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और टेलीकॉम एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Check Also

शातिर नौकरानी की ‘रील’ ने खोला 10 लाख की चोरी का राज: मालकिन के साथ खुद गई थी पुलिस स्टेशन; इंस्टाग्राम पर गहने फ्लॉन्ट करना पड़ा भारी

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसा अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया …