मथुरा। उत्तर प्रदेश में पुलिस उपनिरीक्षक (दरोगा) भर्ती परीक्षा की शुचिता भंग करने की कोशिश कर रहे एक बड़े गिरोह का एसटीएफ (STF) मेरठ और राया पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से पास कराने के नाम पर लाखों रुपये की वसूली कर रहा था। पुलिस ने घेराबंदी कर गैंग के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, जिसके पास से मोबाइल और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं।
22 लाख में तय होता था ‘वर्दी’ का सौदा
एसटीएफ की पूछताछ में पकड़े गए आरोपी अनुज कुमार ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरोह का मुख्य सरगना गोपाल रावत अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें परीक्षा पास कराने का झांसा देता था। प्रति अभ्यर्थी 22 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी जाती थी। डील के तहत, 3 लाख रुपये एडवांस (परीक्षा से पहले) और बाकी के 19 लाख रुपये काम होने के बाद लिए जाने थे।
ब्लूटूथ डिवाइस से नकल की थी साजिश
गिरोह ने नकल के लिए हाईटेक तरीका अपनाया था। इनकी योजना थी कि परीक्षा केंद्र के अंदर अभ्यर्थियों को सूक्ष्म ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके जरिए बाहर बैठे सॉल्वर पेपर हल करवाएंगे। एसटीएफ को आरोपी के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट, एडमिट कार्ड और पैसों के लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं, जो इस गिरोह के नेटवर्क की गहराई को दर्शाते हैं।
रजनी लाइब्रेरी के पास से हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ मेरठ की फील्ड यूनिट को सटीक सूचना मिली थी कि आरोपी अनुज कुमार राया क्षेत्र की रजनी लाइब्रेरी के पास किसी बड़ी योजना को अंजाम देने की फिराक में है। शनिवार रात करीब 8:40 बजे एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर उसे धर दबोचा। हालांकि, गैंग का मुख्य सरगना गोपाल रावत और अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में कामयाब रहे।
फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी
पुलिस ने थाना राया में आरोपी अनुज, सरगना गोपाल रावत और उनके साथियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पकड़े गए आरोपी के पास से 6 एडमिट कार्ड और एक स्मार्टफोन बरामद हुआ है। थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह और एसटीएफ के उपनिरीक्षक संजय कुमार की टीमें अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
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