Monday , 25 May 2026

ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले अमेरिका का बड़ा एक्शन: चीनी कंपनियों पर लगाए नए प्रतिबंध, ईरान की मदद का आरोप…अब क्या होगा आगे…

वाशिंगटन/बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी चीन यात्रा से ठीक पहले दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अहम बैठक की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के साथ सैन्य संबंधों के आरोप में कई चीनी कंपनियों और व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई को बीजिंग के लिए वाशिंगटन के एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

सैटेलाइट तस्वीरों से अमेरिकी सेना पर हमले की साजिश?

शुक्रवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने चार कंपनियों पर प्रतिबंधों की घोषणा की, जिनमें से तीन चीन में स्थित हैं। विभाग का दावा है कि ये कंपनियां ईरान को संवेदनशील सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध करा रही थीं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन तस्वीरों की मदद से ईरान ने मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले करने की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया।

बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बनाने में चीन का हाथ!

इसी कड़ी में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भी 10 व्यक्तियों और संस्थाओं को अपनी प्रतिबंधित सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया है। इनमें से अधिकांश चीन से संचालित हो रही हैं। विभाग का आरोप है कि इन लोगों और कंपनियों ने ईरान को बैलिस्टिक मिसाइलें और घातक ड्रोन बनाने के लिए आवश्यक उन्नत हथियार और कच्चा माल मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विदेश मंत्री मार्को रूबियो की दोटूक: “जवाबदेह ठहराया जाएगा”

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चीन की इन संस्थाओं को ईरान को दिए गए समर्थन के लिए कीमत चुकानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका उन सभी देशों और व्यक्तियों को निशाना बनाएगा जो ईरान के सैन्य और रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। रूबियो के मुताबिक, अमेरिका अपनी सुरक्षा और हितों के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बीजिंग की चेतावनी: ‘एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ’

अमेरिका की इस कार्रवाई पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि वह इन “एकतरफा प्रतिबंधों” का कड़ा विरोध करता है, क्योंकि इनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई ठोस आधार नहीं है। इससे पहले भी चीनी रिफाइनरियों पर लगे प्रतिबंधों के दौरान बीजिंग ने अपनी कंपनियों को अमेरिकी आदेशों की अनदेखी करने का निर्देश दिया था। अब सबकी निगाहें अगले हफ्ते होने वाली ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हैं, जहां इन प्रतिबंधों की गूंज सुनाई देना तय है।

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