कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद अब सबकी नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि बंगाल की कमान किसके हाथ में होगी। राज्य में नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 8 मई, शुक्रवार को कोलकाता में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इसी बैठक में तय होगा कि बंगाल का अगला ‘तुलसीदास’ यानी मुख्यमंत्री कौन होगा।
रवींद्र जयंती पर ऐतिहासिक शपथ ग्रहण: जुटेंगे पीएम मोदी और दिग्गजों का हुजूम
बंगाल की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह बेहद खास होने वाला है। 9 मई, शनिवार को जब पूरा बंगाल कविगुरु रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती मना रहा होगा, उसी दिन कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में नई सरकार का शपथ ग्रहण आयोजित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनडीए शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के कद्दावर मंत्री शामिल होकर बंगाल में कमल खिलने का जश्न मनाएंगे।
शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा भारी: ममता को उनके ही गढ़ में दी शिकस्त
मुख्यमंत्री की रेस में वैसे तो कई नाम शामिल हैं, लेकिन शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। शुभेंदु ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया है। 2021 में नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर में भी ममता को मात देने के चलते दिल्ली से कोलकाता तक के सियासी गलियारों में शुभेंदु के नाम की गूंज सबसे ज्यादा है। शुभेंदु के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और सुकांत मजूमदार जैसे आधा दर्जन नेता भी इस दौड़ में शामिल हैं।
अमित शाह का ‘भूमिपुत्र’ फॉर्मूला: कौन बैठेगा क्राइटेरिया पर फिट?
चुनाव प्रचार के दौरान ही गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया था कि बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री वही बनेगा जो ‘बंगाल की धरती का बेटा हो, यहीं पढ़ा-लिखा हो, बंगाली बोलता हो और भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता हो।’ अमित शाह के इस ‘भूमिपुत्र’ पैमाने पर शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह फिट बैठते हैं। हालांकि, भाजपा आलाकमान चौंकाने वाले फैसलों के लिए जाना जाता है, इसलिए अंतिम मुहर लगने तक सस्पेंस बना हुआ है।
क्या महिला मुख्यमंत्री का दांव खेलेगी भाजपा? रेस में ये नाम भी शामिल
सियासी पंडितों का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि भाजपा बंगाल में किसी महिला चेहरे को आगे लाकर बड़ा संदेश दे सकती है। चूंकि भाजपा ने बंगाल चुनाव में महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया था और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है, ऐसे में अग्निमित्रा पॉल या रूपा गांगुली के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। अगले साल यूपी, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए महिला मुख्यमंत्री का प्रयोग मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।
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