
नई दिल्ली: हवाई यात्रा करने वाले आम यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब किसी भी आपात स्थिति या असाधारण परिस्थितियों में सरकार को हवाई टिकटों के दामों में सीधा हस्तक्षेप करने और उन पर अंकुश लगाने का वैधानिक अधिकार मिल गया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आड़ में विमानन कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने किराए पर नकेल कसने और पूरी टिकट व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया गया है।
वेबसाइट्स पर खत्म होगा हिडन चार्जेस का खेल, बेस फेयर से लेकर टैक्स तक सब दिखाना होगा अलग
नए नियमों के लागू होने के बाद अब एयरलाइंस मनमाने तरीके से कोई भी छिपा हुआ शुल्क (हिडन चार्ज) नहीं वसूल सकेंगी। कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपनी वेबसाइट, ऐप या किसी भी डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म पर टिकट की कुल कीमत के साथ-साथ प्रत्येक शुल्क का स्पष्ट और पारदर्शी ब्रेकअप दिखाएं। इसमें बेस फेयर, सरकारी टैक्स, एयरपोर्ट यूजर फीस, कैंसिलेशन चार्ज, रिफंड की शर्तें और अन्य सभी लागू शुल्क अलग-अलग प्रदर्शित करने होंगे। इससे यात्रियों को बुकिंग कन्फर्म करने से पहले ही पाई-पाई का हिसाब साफ नजर आएगा।
नियम 192 का बड़ा फैसला: असाधारण हालात में केंद्र दे सकेगा सीधे लिखित आदेश
अधिसूचित नियमों के ‘नियम 192’ के प्रावधानों के मुताबिक, यदि केंद्र सरकार को यह प्रतीत होता है कि देश में कोई असाधारण परिस्थिति या आपात संकट पैदा हुआ है और आम जनमानस के व्यापक हित में दखल देना जरूरी है, तो सरकार सीधे एयरलाइंस को किराए को लेकर बाध्यकारी लिखित निर्देश जारी कर सकेगी। हालांकि, नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकार के ये निर्देश परिस्थितियों के अनुरूप होंगे और इन्हें केवल एक निश्चित व सीमित समयावधि के लिए ही प्रभावी रखा जाएगा।
DGCA को सौंपनी होगी किराए की पूरी कुंडली, मनमानी दरों पर रहेगी पैनी नजर
शेड्यूल्ड उड़ानों का संचालन करने वाली सभी एयरलाइंस को अब टिकट का किराया तय करते समय परिचालन लागत (ऑपरेशनल कॉस्ट) सहित सभी वास्तविक मानकों को आधार बनाना होगा। इसके साथ ही हर रूट के किराए की विस्तृत जानकारी और कैल्कुलेशन का पूरा ब्योरा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। एयरलाइंस को अपनी वेबसाइटों पर भी इन दरों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा, जिसकी लगातार और कड़ी निगरानी DGCA द्वारा की जाएगी।
तीन दशक बाद बदला सिस्टम: 1994 से चली आ रही पूरी छूट पर लगा अंकुश
भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में साल 1994 में सरकारी स्तर पर हवाई किराया तय करने की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद से एयरलाइंस पूरी तरह से मांग, आपूर्ति और त्योहारी सीजन के आधार पर डायनामिक प्राइसिंग मॉडल के तहत मनमाना किराया वसूलने के लिए स्वतंत्र थीं। पुराने ‘एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937’ के नियम 135(4) में कंपनियों के अनुचित एकाधिकार और अत्यधिक दरों की स्थिति में DGCA को निर्देश देने का प्रावधान था, लेकिन नए 2026 नियमों ने सरकार को स्पष्ट और प्रभावी शक्तियां देकर आम यात्रियों के अधिकारों को सर्वोपरि स्थान दिया है।
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