Sunday , 1 November 2026

AI से बनाई खूबसूरत लड़कियों की तस्वीरें, फिर शादी का झांसा देकर ठगी: दुर्ग में फर्जी मैरिज ब्यूरो का भंडाफोड़, संचालक गिरफ्तार

दुर्ग: शादी का सपना संजोए बैठे लोगों की भावनाओं और विश्वास से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पर्दाफाश हुआ है। जिले की सुपेला थाना पुलिस ने एक ऐसे फर्जी मैरिज ब्यूरो का भंडाफोड़ किया है, जो शादी के इच्छुक युवकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार की गई सुंदर और काल्पनिक युवतियों की तस्वीरें दिखाकर ठगी का शिकार बनाता था। आरोपी सोशल मीडिया के जरिए देशभर के अविवाहित युवकों को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की चपत लगा चुका है।

फेसबुक-इंस्टाग्राम पर आकर्षक प्रोफाइल्स, असली नहीं बल्कि AI जनरेटेड थीं तस्वीरें जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘कल्याण मैट्रिमोनी’, ‘एलिट मैच मैट्रिमोनी’ और ‘फ्यूचर पार्टनर’ जैसे लुभावने नामों से कई फर्जी प्रोफाइल्स संचालित कर रहा था। इन प्रोफाइल्स पर बेहद आकर्षक दिखने वाली लड़कियों के फोटो अपलोड किए जाते थे। तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि यह तस्वीरें किसी वास्तविक युवती की नहीं, बल्कि आधुनिक AI टूल्स की मदद से विशेष रूप से तैयार की गई काल्पनिक तस्वीरें थीं, ताकि शादी के इच्छुक युवक आसानी से इनके झांसे में आ जाएं।

बायोडाटा मांगते ही शुरू होता था खेल, एडवांस फीस लेकर नंबर कर देते थे ब्लॉक दुर्ग के एएसपी शोभराज अग्रवाल के अनुसार, गिरोह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शादी के विज्ञापन प्रसारित करता था। जब कोई युवक संपर्क करता, तो उससे बायोडाटा और जीवनसाथी को लेकर उसकी पसंद पूछी जाती थी। इसके बाद उसकी पसंद के अनुरूप बनाई गई AI तस्वीरें दिखाकर शादी तय कराने का झूठा भरोसा दिलाया जाता था। शुरुआत में रजिस्ट्रेशन के नाम पर दो हजार रुपये यूपीआई और क्यूआर कोड के जरिए मंगवाए जाते थे। इसके बाद अन्य प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर लगातार पैसे ऐंठे जाते थे। जैसे ही पीड़ित पूरी रकम ट्रांसफर करता, उसका नंबर तुरंत ब्लैकलिस्ट कर बातचीत बंद कर दी जाती थी।

कॉल सेंटर पर दबिश, नौकरी के नाम पर रखी गई थीं 4 युवतियां फर्जीवाड़े की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सुपेला पुलिस ने उत्तर गंगोत्री भवन स्थित ठिकाने पर छापा मारा। मौके से गिरोह के मास्टरमाइंड संचालक परमानंद यादव को दबोचा गया। छापे के दौरान वहां चार युवतियां भी काम करती पाई गईं। पूछताछ में युवतियों ने बताया कि उन्हें सात हजार रुपये महीने के वेतन पर नौकरी का झांसा देकर इस फर्जी कॉल सेंटर में रखा गया था और उनसे ही पीड़ितों को कॉल करवाई जाती थी।

22 कीपैड मोबाइल, नकदी और सिम कार्ड जब्त; आरोपी जेल भेजा गया छापेमारी के दौरान पुलिस ने ठिकाने से 22 कीपैड मोबाइल फोन, 4 आधुनिक एंड्रॉयड स्मार्टफोन, 16 चालू सिम कार्ड, कंप्यूटर सिस्टम, वाई-फाई राउटर, बैंक पासबुक, चेकबुक, क्यूआर कोड और 1.64 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। जब्त किए गए सामान और नकदी की कुल कीमत लगभग 2.83 लाख रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह फर्जी कॉल सेंटर पिछले तीन महीनों से सक्रिय था, जहां रोजाना 20 से 50 कॉल किए जाते थे। पुलिस ने मुख्य आरोपी परमानंद यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

 

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