उत्तर प्रदेश की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा सियासी भूचाल आ गया, जब समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को रामपुर जिला जेल से रिहा होने के चंद मिनटों के भीतर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दोबारा हिरासत में ले लिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा पर रोक और जमानत मिलने के बाद वह करीब 11 महीने बाद जेल की सलाखों से बाहर कदम रख रहे थे। हालांकि, जेल के मुख्य द्वार पर पहले से तैनात ईडी की टीम ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) से जुड़े एक अन्य मामले में तुरंत हिरासत में ले लिया।
‘क्या कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है?’: हिरासत में लिए जाने पर भावुक हुए आजम खान
ईडी द्वारा हिरासत में लिए जाने के दौरान आजम खान बेहद आक्रामक और भावुक मुद्रा में नजर आए। उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण का हवाला देते हुए राज्य सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला। आजम खान ने कहा, “कहने को क्या बचा है? कानून का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। क्या यह एक मुस्लिम होने की सजा है? हमारी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई और बच्चों के लिए स्कूल-कॉलेज खोले। क्या शिक्षा देना हमारा सबसे बड़ा अपराध है?”
जेल के बाहर भारी गहमागहमी, समर्थकों ने की नारेबाजी
जेल प्रशासन के मुताबिक, शनिवार शाम को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और समर्थकों की भारी भीड़ के बीच आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल से रिहा किया गया। जेल के बाहर सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद थे, जो आजम खान के समर्थन में और ईडी की कार्रवाई के विरोध में लगातार नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच जैसे ही आजम खान बाहर निकले, ईडी के अधिकारियों ने उन्हें जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ का हवाला देकर अपनी गाड़ी में बैठा लिया। रिहाई के बाद मीडिया के सवालों पर अब्दुल्ला आजम ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अखिलेश यादव का तीखा वार: ‘बीजेपी से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती’
आजम खान की दोबारा हिरासत पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र और यूपी की सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के राज में किसी भी न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। आजम खान के ‘मुस्लिम होने का खामियाजा भुगतने’ वाले बयान पर सहमति जताते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “उन्होंने जो कहा है वह पूरी तरह सच है। वर्तमान सत्ता से इंसाफ की उम्मीद करना बेमानी है।”
उधर, सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि संविधान अच्छा या बुरा नहीं होता, उसे लागू करने वाले लोग अच्छे और बुरे होते हैं। भाजपा सरकार लगातार फर्जी मुकदमे थोपकर आजम साहब को जेल में बनाए रखने की कायराना साजिश रच रही है। पूरा देश और दुनिया देख रही है कि एजेंसियों का किस कदर घोर दुरुपयोग हो रहा है।”
जौहर यूनिवर्सिटी और मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला
ईडी के सूत्रों के मुताबिक, आजम खान को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जा सकता है। जांच एजेंसी उन्हें गाजियाबाद स्थित सीबीआई/ईडी की विशेष अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी।
गौरतलब है कि ईडी ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और आम जनता के विकास के लिए स्वीकृत सरकारी धन को निजी शिक्षण संस्थान (जौहर यूनिवर्सिटी) के निर्माण में डायवर्ट करने का आरोप लगाया है। इसी कड़ी में 28 अक्टूबर को जांच एजेंसी ने यूनिवर्सिटी की करोड़ों रुपये की जमीन और इमारतों को कुर्क (अटैच) कर दिया था।
दोहरे पैन कार्ड विवाद में मिली थी राहत
बता दें कि अब्दुल्ला आजम के दो अलग-अलग जन्म प्रमाणपत्र और पैन कार्ड बनवाने के विवाद में रामपुर की एमपी/एमएलए विशेष अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और उनके बेटे दोनों को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद अभियोजन पक्ष की अपील पर अदालत ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल और जुर्माना पांच लाख रुपये कर दिया था, जबकि अब्दुल्ला की सात साल की सजा बरकरार रखते हुए जुर्माना साढ़े तीन लाख रुपये कर दिया था।
इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां अदालत ने दोनों की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी, हालांकि उनकी दोषसिद्धि (कन्विक्शन) को रद्द नहीं किया गया था। इसी आदेश के तहत दोनों की रिहाई हो रही थी, लेकिन ईडी की तत्परता ने आजम खान की रिहाई को चंद मिनटों में ही रोक दिया।
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