
प्रयागराज। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। फर्जी पैन कार्ड और दो जन्म प्रमाण पत्र के जरिए धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े से जुड़े चर्चित मामले में हाईकोर्ट ने दोनों की सजा को निलंबित (सस्पेंड) करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि (कनविक्शन) पर रोक लगाने की अर्जी खारिज कर दी है, जिससे उनके चुनावी मैदान में उतरने पर फिलहाल पाबंदी बरकरार रहेगी।
4 साल से अधिक की सजा काटने के आधार पर मिली राहत, जनवरी 2027 में अंतिम सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने क्रिमिनल रिवीजन संख्या 3893/2026 (मोहम्मद आजम खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) और 3685/2026 पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने पाया कि आजम खान इस मामले में पहले ही लगभग 4 वर्ष 1 माह और 9 दिन की सजा काट चुके हैं। इसी तथ्य को संज्ञान में लेते हुए पीठ ने सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दे दी। अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई जनवरी 2027 के तीसरे सप्ताह में नियत की है।
क्या जेल की सलाखों से बाहर आ सकेंगे आजम खान?
जमानत मिलने के बावजूद आजम खान की तत्काल जेल से रिहाई पूरी तरह सुनिश्चित नहीं है। जानकारों के मुताबिक, आजम तभी जेल से बाहर आ सकेंगे जब तक पुलिस किसी अन्य लंबित मुकदमे में उन्हें औपचारिक रूप से कस्टडी में न ले। पुलिस व अभियोजन के पास लखनऊ और रामपुर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट, 1988) के तहत विचाराधीन मामलों में अदालत से ‘बी-वारंट’ हासिल करने का विकल्प मौजूद है। यदि जांच एजेंसियां नया बी-वारंट दाखिल नहीं करती हैं, तभी उनकी जेल से वास्तविक रिहाई संभव हो पाएगी।
दोषसिद्धि पर रोक से इनकार, फिलहाल नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
अदालत ने सजा तो निलंबित कर दी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के प्रावधानों के तहत यदि किसी जनप्रतिनिधि को 2 वर्ष या उससे अधिक की कैद की सजा होती है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाता है और यह अयोग्यता सजा पूरी होने के बाद भी अगले 6 वर्षों तक प्रभावी रहती है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के नवजोत सिंह सिद्धू और विक्रम सिंह सैनी मामलों के नजीरों का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि दोषसिद्धि पर रोक केवल अत्यंत दुर्लभ और ‘असाधारण मामलों’ में ही लगाई जा सकती है। जब तक किसी उच्च अदालत से कनविक्शन पूरी तरह निरस्त नहीं हो जाता, तब तक आजम खान और अब्दुल्ला आजम का चुनावी भविष्य अधर में ही रहेगा।
आजम खान पर मुकदमों की लंबी फेहरिस्त, 81 से अधिक केस अब भी पेंडिंग
अदालती दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, आजम खान के खिलाफ कुल 92 से 93 आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं। इनमें से वे कई मामलों में बरी हो चुके हैं या उन्हें अग्रिम/नियमित जमानत मिल चुकी है।
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सजा के मामले: आजम खान को अब तक कुल 8 मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है (जिनमें 2 सेशन कोर्ट और 6 मजिस्ट्रेट कोर्ट से हैं)। मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा दी गई 2 सजाओं के खिलाफ दायर उनकी अपीलें भी खारिज हो चुकी हैं। मौजूदा फर्जी दस्तावेज मामले में रामपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने उन्हें 10 वर्ष तक के कठोर कारावास का दंड सुनाया था।
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पेंडिंग केस: कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। विभिन्न अदालतों में आजम खान के खिलाफ 81 से अधिक मामले अब भी विचाराधीन हैं, जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ लगभग 44 आपराधिक मामले पेंडिंग चल रहे हैं।
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