
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2028 में आयोजित होने वाली कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अध्ययन योजना और परीक्षा पैटर्न में बड़े बदलावों की घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप तैयार की गई इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों के लिए त्रि-भाषा फॉर्मूला लागू किया गया है, साथ ही वोकेशनल यानी स्किल एजुकेशन को भी अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड के इस कदम का सीधा असर देश-विदेश के लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई और मूल्यांकन प्रक्रिया पर पड़ेगा।
पांच मुख्य विषय अनिवार्य, स्किल सब्जेक्ट से सुधर सकेगा रिजल्ट
बोर्ड की नई योजना के तहत 10वीं के विद्यार्थियों को पांच अनिवार्य विषयों का अध्ययन करना होगा। इसके अलावा, छात्रों को एक अतिरिक्त स्किल (व्यावसायिक) विषय चुनने का विकल्प भी दिया जाएगा। इस वोकेशनल विषय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और रोजगारपरक दक्षताओं से जोड़ना है।
यदि कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों में से किसी एक में उत्तीर्ण नहीं हो पाता है, तो बोर्ड के तय नियमों के आधार पर अतिरिक्त स्किल सब्जेक्ट के अंक उसके अंतिम परिणाम को सुधारने में सहायक होंगे।
वोकेशनल एजुकेशन अनिवार्य, 22 स्किल विषयों का मिलेगा विकल्प
सीबीएसई की निदेशक (एकेडमिक्स) प्रज्ञा एम. सिंह के अनुसार, वर्ष 2028 में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए वोकेशनल शिक्षा अनिवार्य रहेगी। इसके लिए छात्र कौशल विकास से जुड़े निर्धारित विषयों अथवा बोर्ड द्वारा प्रस्तावित 22 स्किल विषयों की सूची में से अपनी रुचि के अनुसार किसी एक विषय का चयन कर सकेंगे।
मूल्यांकन के लिए दो विकल्प, मिलेगा राष्ट्रीय स्तर का सर्टिफिकेट
कौशल विषयों के असेसमेंट को लेकर बोर्ड ने छात्रों को दोहरे विकल्प की सुविधा प्रदान की है। विद्यार्थी चाहें तो स्कूल स्तर पर होने वाले आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) का हिस्सा बन सकते हैं, अथवा वे औपचारिक बोर्ड परीक्षा में बैठकर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्किल सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। यह सर्टिफिकेट उच्च शिक्षा और पेशेवर करियर दोनों स्तरों पर उपयोगी साबित होगा।
थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू, दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी
सीबीएसई ने कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस नियम की सबसे अहम शर्त यह है कि पढ़ी जाने वाली तीन भाषाओं में से कम से कम दो अनिवार्य रूप से भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। इस बड़े शैक्षणिक बदलाव से कक्षा 9वीं और 10वीं के करीब 50 लाख विद्यार्थी सीधे प्रभावित होंगे। हालांकि, वर्तमान में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों को इस सत्र में तीसरी भाषा की परीक्षा देने की बाध्यता नहीं होगी।
2026-27 के 9वीं के बैच से लागू होंगे नियम, जानें किन पर पड़ेगा असर
सीबीएसई का यह नया फ्रेमवर्क शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से लागू होगा, जो आगे चलकर वर्ष 2028 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा देंगे। वर्तमान समय में 10वीं कक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर यह नया नियम लागू नहीं होगा।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंटरडिसिप्लिनरी एरिया, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े संक्षिप्त मॉड्यूल इस मुख्य स्टडी स्कीम का हिस्सा नहीं होंगे। इन संपूर्ण परिवर्तनों का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी कौशल से लैस करना है।
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