
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में विरोधी विचारधारा के दिग्गज नेताओं का एक मंच पर नजर आना हमेशा से कौतूहल और चर्चा का केंद्र रहा है। गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक भव्य पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान कुछ ऐसा ही दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने एक साथ मंच साझा किया। प्रदेश के तीन प्रमुख राजनीतिक चेहरों को एक साथ देखकर जहां कई तरह के कयास लगने लगे, वहीं मंच से चले हल्के-फुल्के तंज और ठहाकों ने सियासी तनाव को कुछ देर के लिए पूरी तरह भुला दिया।
पुस्तक विमोचन के बहाने एक मंच पर जुटा ठाकरे परिवार और फडणवीस
यह विशेष कार्यक्रम 75 दिग्गज कार्टूनिस्टों की कृतियों और उनकी रूपरेखा पर केंद्रित पुस्तक ‘महाराष्ट्र ची हास्यरेषा’ (द लाफ्टर लाइन्स ऑफ महाराष्ट्र) के लोकार्पण के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। कला और हास्य से सजे इस मंच की शुरुआत में राज्य के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने राज ठाकरे के निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करने के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस की सराहना की। उन्होंने कहा कि कला, साहित्य और संस्कृति के संवर्धन के लिए राजनेताओं को आपसी मतभेदों और राजनीतिक सीमाओं को दरकिनार कर देना चाहिए।
‘2029 तक सीएम बने रहें फडणवीस’: राज ठाकरे के तंज पर मुख्यमंत्री का मजेदार पलटवार
समारोह के दौरान राजनीतिक मतभेदों के बावजूद स्वस्थ संवाद बनाए रखने की परंपरा पर खुलकर बात हुई। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने चिरपरिचित अंदाज में चुटकी लेते हुए संस्कृति मंत्री आशीष शेलार से कहा कि वह फडणवीस को बार-बार अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते शेलार यह सुनिश्चित करें कि फडणवीस 2029 तक मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहें। राज ठाकरे के इस बयान पर पूरे सभागार में जोरदार ठहाके गूंज उठे।
इस हाजिरजवाबी पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी उसी मजाकिया लहजे में जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा सभी के निमंत्रण को स्वीकार करते आए हैं, चाहे वह उद्धव ठाकरे ही क्यों न हों। फडणवीस ने चुटकी लेते हुए कहा कि वर्ष 2019 तक उद्धव ठाकरे ने उन्हें जब भी आवाज दी, वह बिना झिझक पहुंचे, लेकिन 2019 के बाद उन्होंने कभी नहीं बुलाया और वह तब से बस उनके बुलावे की राह देख रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह तंज 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा और अविभाजित शिवसेना के बीच हुए अलगाव की पृष्ठभूमि से जुड़ा था, जिसे सुनकर मंच और दीर्घा दोनों में मौजूद लोग मुस्कुरा उठे।
‘विरोधी साथ चाय पी सकते हैं, यह महाराष्ट्र की परंपरा है’: देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि विरोधी दलों के नेताओं को एक साथ देखकर किसी को भी अचंभित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दलों के नेताओं का एक ही मंच पर मौजूद होना, साथ बैठकर हंसना और चाय की चुस्कियां लेना महाराष्ट्र की समृद्ध और लोकतांत्रिक परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत संवाद और सांस्कृतिक सौहार्द का कायम रहना राज्य की असली पहचान है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मुंबई में कार्टूनिस्टों के ऐतिहासिक योगदान को संजोने के लिए एक समर्पित कार्टूनिस्ट आर्ट गैलरी स्थापित करने की घोषणा की। फडणवीस ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक परियोजना को आकार देने के लिए वह उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों से रचनात्मक सहयोग और सुझाव मांगेंगे।
‘कुछ मंच सियासत से ऊपर होते हैं’: राज ठाकरे ने समझाया एक साथ आने का कारण
समारोह के समापन पर राज ठाकरे ने मीडिया और उपस्थित लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि तीनों नेता आखिर एक मंच पर कैसे और क्यों आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में कुछ ऐसे गैर-राजनीतिक मंच भी होते हैं जहां पार्टीगत मतभेदों को पीछे छोड़ना जरूरी होता है। जब विषय कला, साहित्य और संस्कृति का हो, तो वहां सियासत नहीं बल्कि सृजन और विचारों का आदान-प्रदान प्रमुख होना चाहिए।
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