Tuesday , 27 October 2026

मेरठ ब्लू ड्रम मर्डर केस में नया मोड़ : फांसी की सजा पाए मुस्कान और साहिल के लिए एक ही वकील पहुंचा हाईकोर्ट, बेटी के भविष्य पर भी उठे सवाल

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के बहुचर्चित ‘ब्लू ड्रम हत्याकांड’ में फांसी की सजा पाने वाले मुख्य आरोपियों मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल की कानूनी पैरवी को लेकर सियासी व कानूनी हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा (फांसी) के खिलाफ दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि हाईकोर्ट में दोनों अभियुक्तों की अपील एक ही वकील के जरिए दाखिल की गई है। चर्चा है कि इस अधिवक्ता को साहिल के परिजनों ने हायर किया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या साहिल के परिवार ने मुस्कान को भी अपना लिया है। हालांकि, परिजनों की तरफ से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

निचली अदालत में अलग-अलग वकीलों ने लड़ी थी जंग, सरकारी खर्चे पर मिली थी मुस्कान को पैरवी

पति सौरभ की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके कथित प्रेमी साहिल को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। स्थानीय अदालत में ट्रायल के दौरान दोनों का कानूनी प्रतिनिधित्व पूरी तरह अलग था। हत्याकांड के बाद मुस्कान के मायके वालों ने उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया था और किसी भी तरह की कानूनी मदद देने से इनकार कर दिया था। इसके चलते मुस्कान की अर्जी पर अदालत ने उसे सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता रेखा जैन उपलब्ध कराई थीं। वहीं दूसरी ओर, साहिल की पैरवी उसके अपने परिवार द्वारा नियुक्त किए गए निजी वकील कर रहे थे।

हाईकोर्ट में एक ही वकील आने से कयासबाजी तेज

निचली अदालत से मृत्युदंड मिलने के बाद जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तो दोनों की ओर से एक ही अधिवक्ता के वकालतनामे ने सबको हैरान कर दिया। जेल सूत्रों के अनुसार, मुस्कान ने कानूनी अपील के लिए जेल प्रशासन से सरकारी वकील की मांग की थी। इसी दौरान साहिल के परिवार ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने के लिए एक निजी अधिवक्ता की सेवाएं लीं। इसी वकील ने साहिल के साथ-साथ मुस्कान की तरफ से भी सजा-ए-मौत के खिलाफ अपील दाखिल कर दी। कानूनी जानकारों का कहना है कि संयुक्त केस और समान परिस्थितियों के चलते तकनीकी सहूलियत के लिए एक वकील की सेवाएं ली जा सकती हैं, लिहाजा केवल एक ही वकील होने से यह तय नहीं माना जा सकता कि साहिल के परिवार ने मुस्कान को रिश्ते के तौर पर स्वीकार कर लिया है।

मासूम बेटी की परवरिश को लेकर असमंजस, क्या आगे आएगा साहिल का परिवार?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुस्कान की मासूम बेटी के भविष्य और परवरिश को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि क्या साहिल का परिवार बच्ची की देखभाल का जिम्मा उठाने के लिए तैयार होगा। इस मुद्दे पर मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने जेल नियमावली की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि जेल नियमों के तहत मासूम बच्ची की कस्टडी किसे सौंपी जाए, इसका अंतिम निर्णय पूरी तरह से उसकी मां मुस्कान की रजामंदी पर निर्भर करेगा। यदि साहिल के परिजन बच्ची को अपने संरक्षण में लेने के इच्छुक हैं, तो उन्हें इसके लिए विधिवत प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद वह आवेदन मुस्कान के समक्ष रखा जाएगा और उसकी लिखित सहमति के आधार पर ही कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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