
नई दिल्ली। करवा चौथ का पर्व आते ही चारों ओर सुहागिनों के सजने-संवरने, हाथों में मेहंदी रचाने और पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखने की तस्वीरें जेहन में उभरने लगती हैं। पारंपरिक तौर पर यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख के लिए रखती हैं। हालांकि, बदलते दौर में अब अविवाहित युवतियों में भी इस पावन पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई लड़कियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना के लिए, तो कुछ अपने मंगेतर (होने वाले पति) के लिए यह व्रत रखना चाहती हैं।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या शादी से पहले यह व्रत रखना शास्त्रों के अनुरूप है? यदि कोई अविवाहित लड़की यह उपवास रखना चाहती है, तो उसके नियम सुहागिनों से किस तरह अलग होते हैं? आइए जानते हैं करवा चौथ 2026 पर कुंवारी लड़कियों के व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम और परंपराएं।
क्या कुंवारी लड़कियां रख सकती हैं करवा चौथ का व्रत?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। इसमें कोई धार्मिक मनाही नहीं है, बशर्ते इसे सही नीयत और नियमों के साथ रखा जाए। जिन कन्याओं की सगाई या रोका हो चुका है, वे अपने भावी जीवनसाथी की दीर्घायु और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए यह संकल्प ले सकती हैं। वहीं, जो युवतियां अविवाहित हैं, वे भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना कर सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत कर सकती हैं।
कुंवारी कन्याओं के लिए क्या हैं व्रत के खास नियम?
अविवाहित लड़कियों के लिए करवा चौथ के व्रत नियम सुहागिन महिलाओं से थोड़े भिन्न होते हैं। परंपराओं के अनुसार, कुंवारी लड़कियों के लिए निर्जला (बिना पानी के) व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना गया है। वे अपनी शारीरिक क्षमता और सुविधा के अनुसार फलाहार ले सकती हैं और जल ग्रहण कर सकती हैं। व्रत का मूल भाव निष्ठा और मंगलकामना है, इसलिए कठिन हठयोग की जगह श्रद्धा को प्राथमिकता दी जाती है। व्रत का संकल्प लेने से पहले अपने कुल और परिवार के वरिष्ठजनों की रीति-नीति समझना भी श्रेयस्कर रहता है।
करवा चौथ पर किसकी और कैसे करें पूजा?
कुंवारी लड़कियों को इस दिन विशेष रूप से शिव परिवार की आराधना करनी चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती को अखंड और आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना जाता है।
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शाम के समय पूजा स्थान पर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
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माता पार्वती और भगवान शिव को पुष्प, अक्षत, रोली और मिष्ठान्न अर्पित करें।
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करवा चौथ की पावन व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
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मनचाहा वर पाने या भावी जीवनसाथी की सलामती के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।
क्या अविवाहित लड़कियों के लिए जरूरी है सरगी?
करवा चौथ पर भोर में सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण करने की रस्म मुख्य रूप से सास और बहू के रिश्ते से जुड़ी होती है, जिसमें फल, मेवे और मिष्ठान्न दिए जाते हैं। चूंकि अविवाहित लड़कियों के लिए ससुराल का यह बंधन लागू नहीं होता, इसलिए उनके लिए सास की ओर से सरगी की कोई अनिवार्यता नहीं है। वे अपने मायके में ही भोर में हल्का, पौष्टिक भोजन या फल ले सकती हैं। जिन लड़कियों की सगाई हो चुकी है, वे चाहें तो अपने होने वाले ससुराल के रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए उनकी परंपरा अपना सकती हैं।
छलनी और चांद नहीं, तारे देखकर व्रत खोलने की है परंपरा
विवाहित महिलाएं रात में चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्रमा और पति का दीदार कर अर्घ्य देती हैं। इसके विपरीत, कई आंचलिक और शास्त्रीय परंपराओं में अविवाहित कन्याओं के लिए तारे (विशेषकर ध्रुव तारा या सांझ का तारा) देखकर अर्घ्य देने और व्रत का पारण करने का विधान है। वे तारों को जल का अर्घ्य देकर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करती हैं। हालांकि, जिन परिवारों में युवतियां भी चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती आई हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन कर सकती हैं।
करवा चौथ 2026 की सही तिथि
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला करवा चौथ का पावन पर्व इस वर्ष गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिनों के साथ-साथ युवतियां भी आस्था और विश्वास के साथ शिव-गौरी से मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।
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