
लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में वापसी की हैट्रिक लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राजधानी लखनऊ में 30 अक्तूबर को होने वाली प्रदेश कार्यसमिति की महाबैठक को लेकर संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में रविवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर 30 अक्तूबर के आयोजन की रूपरेखा और तैयारियों की गहन समीक्षा की। अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आयोजित हो रही यह कार्यसमिति संगठन और सत्ता दोनों के भविष्य के लिहाज से निर्णायक मानी जा रही है।
अमित शाह और राजनाथ सिंह भरेंगे चुनावी हुंकार
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में प्रस्तावित इस कार्यसमिति का महत्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सीधी मौजूदगी से काफी बढ़ गया है। लखनऊ के स्थानीय सांसद और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, चारों सह-प्रभारी और प्रदेश के शीर्ष पदाधिकारी भी इस महामंथन का हिस्सा बनेंगे। मुख्य बैठक से ठीक एक दिन पहले, यानी 29 अक्तूबर को भी प्रदेश पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें कार्यसमिति के राजनीतिक प्रस्तावों और एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा। हालांकि आधिकारिक एजेंडा अभी गोपनीय रखा गया है, लेकिन माना जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह का मार्गदर्शन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने का काम करेगा।
विपक्ष के नैरेटिव की धार कुंद करने का बनेगा मास्टरप्लान
कार्यसमिति के मंच से भाजपा विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे राजनीतिक और सामाजिक नैरेटिव को ध्वस्त करने का पुख्ता खाका खींचेगी। बैठक का मुख्य फोकस सांगठनिक गतिविधियों को सीधे चुनावी नतीजों में तब्दील करने पर होगा। कमजोर विधानसभा क्षेत्रों में जनाधार मजबूत करने, अंदरूनी नाराजगी को दूर करने और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में जोड़कर स्थानीय स्तर पर बेहतर तालमेल बिठाने की रणनीति पर शीर्ष नेतृत्व खुलकर बात करेगा। क्षेत्रवार चुनौतियों की पहचान कर उनके त्वरित समाधान की समयसीमा भी तय की जा सकती है।
माइक्रो मैनेजमेंट: हर बूथ का अलग जातीय और सामाजिक समीकरण
भाजपा अब पूरे प्रदेश के लिए एक समान रणनीति के पारंपरिक ढर्रे से हटकर ‘माइक्रो लेवल’ पर काम करने जा रही है। पार्टी की नई रणनीति के तहत प्रत्येक बूथ की स्थानीय राजनीतिक स्थिति और जातीय समीकरणों के आधार पर अलग-अलग खाका तैयार किया जाएगा। संगठन का जोर केवल मतदाताओं तक पहुंचने भर का नहीं है, बल्कि स्थानीय मुद्दों के कारण पनपे असंतोष को मतदान से पहले ही दूर कर एक-एक समर्थक का वोट सुनिश्चित करना है। इसके लिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा ताकि मतदान के दिन पार्टी को किसी भी अप्रत्याशित नुकसान का सामना न करना पड़े।
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