Friday , 23 October 2026

शिवा शर्मा हत्याकांड: सिम फेंककर राहगीरों के वाई-फाई से पुलिस को छकाती रही श्रद्धा, 2200 किमी की फरारी के बाद नागपुर कैब चालक ने कराई गिरफ्तारी

राजधानी लखनऊ के चर्चित कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे की फरारी की पटकथा किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं थी। वारदात के बाद से 10 दिनों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाली श्रद्धा के शातिरपने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने हर मोड़ पर पुलिस की सर्विलांस टीम को मात दी। पुलिस मोबाइल टावर लोकेशन के सहारे सुराग तलाशती रही और वह सिम कार्ड निकालकर फेंक चुकी थी। रास्ते में चलते-फिरते रिक्शा, ई-रिक्शा और टैक्सी चालकों से वाई-फाई हॉटस्पॉट लेकर वह सिर्फ व्हाट्सएप और फेसटाइम के जरिए बात करती थी। मगर जिस डिजिटल लुकाछिपी के दम पर वह पुलिस को छका रही थी, अंत में वही तकनीक उसके गले की फांस बन गई। नागपुर ले जाने वाले कैब चालक के मोबाइल से कनेक्ट किया गया वाई-फाई ही पुलिस को उसके छिपे ठिकाने तक ले गया।

सिम निकाला और शुरू किया हॉटस्पॉट का खेल, ऐसे गच्चा खाती रही पुलिस

वारदात की रात 9 अक्तूबर को केजीएमयू अस्पताल से फरार होने के बाद श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश ने अपने फोन से किसी को सामान्य नेटवर्क कॉल नहीं की। तीनों ने मोबाइल से सिम कार्ड निकाल दिए थे, जिससे पारंपरिक सेलुलर ट्रैकिंग पूरी तरह नाकाम हो गई। हालांकि, फरारी के दौरान कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर उनके हैंडसेट पर कुछ मिनटों के लिए इंटरनेट एक्टिव होता था और फिर तुरंत बंद हो जाता था। लखनऊ पुलिस की साइबर सेल जब आईपी एड्रेस को ट्रैक करते हुए मौके पर पहुंचती, तो वहां कोई रिक्शा चालक, ई-रिक्शा वाला या स्थानीय कैब चालक मिलता। पूछताछ में वे सभी महिला के बारे में कुछ भी बता पाने में असमर्थ रहते, क्योंकि श्रद्धा केवल कुछ मिनटों के लिए हॉटस्पॉट मांगकर अपना काम निकालती और आगे बढ़ जाती थी।

80 की स्पीड बनी रुकावट, कानपुर में कैब बदलना पड़ा भारी

लखनऊ में मीडिया को गोपनीय तरीके से बयान देने के बाद श्रद्धा ने कमता से सीधे नागपुर के लिए एक अर्टिगा कैब बुक की। सफर के दौरान उसे पता चला कि उस गाड़ी में स्पीड गवर्नर लगा है और उसकी अधिकतम रफ्तार 80 किमी प्रति घंटा ही है। पकड़े जाने के डर से उसने कानपुर पहुंचते ही वह कैब छोड़ दी और दूसरी अर्टिगा किराए पर ली। इसी दूसरी कैब के चालक के मोबाइल से श्रद्धा ने अपने फोन का वाई-फाई कनेक्ट किया। इंटरनेट का यह कनेक्शन बार-बार जुड़ता और टूटता रहा। इसी डिजिटल फुटप्रिंट को पकड़कर प्रयागराज एसटीएफ और लखनऊ पुलिस की संयुक्त टीम हरकत में आई। लोकेशन फतेहपुर और फिर सतना होते हुए नागपुर की तरफ बढ़ते देख एसटीएफ ने पीछा तेज कर दिया।

ड्राइवर को छोड़ते ही नागपुर पुलिस ने दबोचा, सीधे फ्लैट तक ले गया

नागपुर पहुंचते ही श्रद्धा को लगा कि वह 2200 किमी दूर आकर सुरक्षित हो चुकी है और अब यूपी पुलिस की पहुंच से बाहर है। लेकिन जैसे ही कैब चालक आरोपियों को उनके किराए के फ्लैट पर छोड़कर वापस निकला, लखनऊ पुलिस के सटीक इनपुट पर नागपुर पुलिस ने उसे रास्ते में ही हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो चालक तुरंत टूट गया और उसने सीधे उस अपार्टमेंट और फ्लैट का दरवाजा दिखा दिया, जहां तीनों ठहरे हुए थे। इस तरह अपने ही वाई-फाई कनेक्शन के जाल में उलझकर श्रद्धा आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गई।

2200 किमी की दौड़: नेपाल में बिना आईडी का होटल, बुर्का और झोले में सामान

श्रद्धा दुबे की 10 दिनों की फरारी के दौरान पुलिस हर बार 5 से 6 घंटे की देरी से पहुंची। 9 अक्तूबर की रात घायल शिवा को केजीएमयू में छोड़कर वह सीतापुर-महमूदाबाद के रास्ते बहराइच पहुंची और 10 अक्तूबर की सुबह 6:20 बजे रुपईडीहा बॉर्डर पार कर नेपाल के बुटवल पहुंच गई। वहां उसने बिना पहचान पत्र वाले एक होटल में शरण ली। 16 अक्तूबर को जब नेपाल में भी घेराबंदी बढ़ी, तो वह महराजगंज के भगवानपुर बॉर्डर के रास्ते बुर्का पहनकर भारत में दाखिल हुई। पहचान छिपाने के लिए अपने महंगे ट्रॉली बैग एक स्थानीय ड्राइवर को सौंप दिए और कपड़ों को सामान्य झोलों में भरकर नौतनवा पहुंची। वहां से किराए की गाड़ी से रायबरेली आई, जहां बिना आईडी होटल न मिलने पर वह आउटर से 17 अक्तूबर की सुबह आगरा पहुंच गई।

लखनऊ में मीडिया को बाइट देकर उड़ाईं पुलिस की नींद, गिरीं कई गाजें

18 अक्तूबर को श्रद्धा ने पुलिस की नाक के नीचे लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में पहुंचकर एक राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी को वीडियो बाइट दी। जैसे ही शाम को यह बयान चैनलों पर प्रसारित हुआ, लखनऊ पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए। लगातार नाकामी के चलते हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया, जबकि डीसीपी मध्य विक्रांत वीर और एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को उनके पदों से हटा दिया गया। इस बीच तीनों पर घोषित इनाम 25-25 हजार से बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया गया।

कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड: घटना से गिरफ्तारी तक का पूरा घटनाक्रम

  • 9 अक्तूबर: हजरतगंज के बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत। श्रद्धा घायल शिवा को अस्पताल छोड़कर फरार।

  • 10 अक्तूबर: मृतक की मां रंजना शर्मा की तहरीर पर हजरतगंज थाने में मॉडल श्रद्धा दुबे, बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश और मैनेजर आदिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज। सुबह 6:20 बजे रुपईडीहा बॉर्डर से आरोपियों के नेपाल भागने की पुष्टि।

  • 13 अक्तूबर: पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। नेपाल सीमा के पास रुपईडीहा में श्रद्धा की लावारिस एसयूवी बरामद।

  • 15 अक्तूबर: सोशल मीडिया पर श्रद्धा के कई वीडियो वायरल, जिसमें उसने घटना को आत्महत्या बताते हुए खुद को निर्दोष कहा और शिवा पर कई आरोप लगाए।

  • 16 अक्तूबर: नेपाल पुलिस से संपर्क साधकर संभावित ठिकानों पर दबिश, आरोपी नेपाल छोड़कर महराजगंज के रास्ते भारत लौटे।

  • 17 अक्तूबर: कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी; लापरवाही के आरोप में हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह लाइन हाजिर।

  • 18 अक्तूबर: आरोपियों पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये की गई। लखनऊ में वीडियो बाइट प्रसारित होने के बाद डीसीपी मध्य विक्रांत वीर हटाए गए।

  • 19 अक्तूबर: रायबरेली में परिजनों से पूछताछ; एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा भी हटाए गए।

  • 20 अक्तूबर: नागपुर में कैब चालक के जरिए लोकेशन ट्रैक कर लखनऊ पुलिस व एसटीएफ ने श्रद्धा, रश्मि और दानिश को दबोचा।

  • 21 अक्तूबर: नागपुर कोर्ट से तीनों आरोपियों की ट्रांजिट रिमांड मंजूर; लखनऊ लाते समय एसटीएफ ने चौथे नामजद आरोपी मैनेजर आदिल को भी धर दबोचा।

 

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